रासलीला से संस्कार और एकता का संदेश, जयप्रिया शरण महाराज ने बताया सनातन धर्म का महत्व
पीलीभीत। शहर के अग्रवाल सभा भवन में चल रहे रसोत्सव में श्रद्धा और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिल रहा है। श्रीराधा माधव संकीर्तन मंडल ‘ना’ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिदिन रासलीला का मंचन देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं।
रविवार को मंडल की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में वृंदावन धाम से पधारे जयप्रिया शरण महाराज ने ठाकुरजी की रासलीला के गहरे आध्यात्मिक अर्थों को समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के संस्कार और धर्म की शिक्षा देने का माध्यम हैं। रासलीला से न सिर्फ बच्चों में नैतिकता और साहस के संस्कार जन्म लेते हैं, बल्कि परिवार और समाज को भी संगठित होने की प्रेरणा मिलती है।महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण की हर लीला हमें ईर्ष्या, अहंकार और अंधकार के अंत की सीख देती है। “बच्चों को डरपोक नहीं, संस्कारी और निडर बनाइए,” उन्होंने कहा। “जब परिवार साथ बैठकर लीला का दर्शन करता है, तब घर में भक्ति और समझ की ज्योति जलती है।”उन्होंने यह भी कहा कि आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता एकता की है। “सब साथ चलें, नेक रहें — यही सनातन धर्म का मूल संदेश है,” महाराज ने कहा। संकीर्तन और रासलीला जैसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने का माध्यम बन रहे हैं।इस मौके पर मंडल अध्यक्ष विश्वनाथ चंद्रा, मंत्री अतुल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष दीपक गोयल, उपमंत्री डॉ. निर्देश जैसवार, नीरज रस्तोगी और प्रमोद पंत सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
