देहरादून

महिला सुरक्षा और अधिकार संरक्षण को लेकर राज्य महिला आयोग की नई कार्ययोजना तैयार

13 जनपदों में उपाध्यक्षों को सौंपी गई जिम्मेदारी, आयोग में 10 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव पारित

देहरादून, 16 सितम्बर 2026। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम बोर्ड बैठक बुधवार को निदेशालय, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, देहरादून में आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में महिला सुरक्षा, अधिकार संरक्षण, जनजागरूकता और आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के साथ आगामी वर्ष की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में प्रदेश के सभी 13 जनपदों में आयोग की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत आयोग की उपाध्यक्षों को जनपदवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

ऐश्वर्या रावत को पौड़ी, टिहरी एवं रुद्रप्रयाग, चन्द्रकला तिवारी को उत्तरकाशी एवं चमोली तथा शायरा बानो को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा एवं पिथौरागढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। उपाध्यक्ष एवं सदस्य संबंधित जनपदों में नियमित जनसुनवाई, महिला जागरूकता कार्यक्रम, वन स्टॉप सेंटर के निरीक्षण तथा महिला अधिकारों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को गति देंगी।

आयोग में 10 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव

महिलाओं की बढ़ती शिकायतों और आयोग के कार्यभार को देखते हुए बोर्ड बैठक में आयोग में 10 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके साथ ही आयोग के सदस्यगण के मानदेय में यथोचित वृद्धि तथा स्वच्छता कर्मी के वेतन में वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

बैठक में वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, महिला हेल्प डेस्क, साइबर अपराध से जुड़े मामलों और विधिक जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। आयोग ने महिलाओं एवं बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया।

“अंतिम छोर तक महिला को न्याय पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता”

आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय, ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों से महिलाएं अपनी शिकायतें लेकर आयोग तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतों की बढ़ती संख्या इस बात को दर्शाती है कि महिलाएं आयोग को न्याय और संरक्षण के विश्वसनीय मंच के रूप में देख रही हैं।

उन्होंने कहा, “प्रदेश की अंतिम छोर पर बैठी प्रत्येक महिला तक न्याय पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

कुसुम कंडवाल ने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों का समाधान करना नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की प्रभावी रक्षा करते हुए उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर तथा आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग सरकार और प्रशासन के समन्वय से महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य करेगा। आयोग की कोशिश रहेगी कि प्रदेश की अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला, सीमांत क्षेत्र की बेटी और दूरस्थ गांव की महिला को भी यह भरोसा हो कि राज्य महिला आयोग उसके साथ खड़ा है।

बैठक में सदस्य सचिव उर्वशी चौहान, उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, चन्द्रकला तिवारी एवं शायरा बानो, विधि अधिकारी दयाराम सिंह, प्रशासनिक अधिकारी नारायण सिंह तोमर, उप निरीक्षक स्वाति चमोली, आधार वर्मा, वीरेन्द्र रावत, अंजली ध्यानी सहित आयोग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।