1320 मेगावाट बिजली खरीद पर प्रमुख सचिव ऊर्जा का स्पष्टीकरण, बोले—नियमों और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया का हो रहा पूरा पालन
कांग्रेस के सवालों पर डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने दी सफाई, अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर होगा
देहरादून। उत्तराखंड में 1320 मेगावाट थर्मल पावर की प्रस्तावित बिजली खरीद प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ओर से उठाए गए सवालों के बीच प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी निविदा और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की स्वीकृति के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रमुख सचिव के अनुसार, बिजली खरीद का उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक और बढ़ती बिजली आवश्यकता को पूरा करने के लिए बेस-लोड बिजली की व्यवस्था करना है।
पांच कंपनियां RFQ चरण में योग्य
डॉ. सुंदरम ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि बिजली खरीद का कार्य बिना प्रतिस्पर्धा के किसी एक कंपनी को दिया जा रहा है। Request for Quotation (RFQ) चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गई हैं। इसके बाद Request for Proposal (RFP) की प्रक्रिया में भी प्रतिस्पर्धा कायम है। अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली में प्राप्त कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 1320 मेगावाट क्षमता की व्यवस्था राज्य की दीर्घकालिक बेस-लोड जरूरत को ध्यान में रखकर प्रस्तावित की गई है, ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
देश में कहीं भी संयंत्र लगाने का विकल्प
प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील राज्य भी है। थर्मल पावर प्लांट के लिए बड़ी मात्रा में कोयले की जरूरत होती है और लंबी दूरी से कोयला पहुंचाने पर परिवहन लागत बढ़ सकती है।
इसी वजह से निविदा में संयंत्र को देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का विकल्प रखा गया है। हालांकि, उत्तराखंड में संयंत्र स्थापित करने पर कोई रोक नहीं है। यदि कोई कंपनी उत्तराखंड में संयंत्र लगाकर प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराती है तो वह भी निर्धारित प्रक्रिया में भाग ले सकती है।
ट्रांसमिशन लागत कुल टैरिफ का हिस्सा
डॉ. सुंदरम ने कहा कि जिस स्थान पर बिजली का उत्पादन होगा, वहां से उत्तराखंड तक बिजली पहुंचाने के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन व्यवस्था और उसकी लागत निविदा एवं टैरिफ की शर्तों के अनुसार निर्धारित होगी। इसलिए केवल संयंत्र के दूसरे राज्य में स्थापित होने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि पूरा अतिरिक्त खर्च उत्तराखंड के उपभोक्ताओं पर आएगा। वास्तविक वित्तीय प्रभाव का आकलन कुल बिजली टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।
Fixed Charge की सीमा 70 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत
प्रमुख सचिव ने बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के वर्ष 2019 के Model Bidding Document में Fixed Charge की सीमा 70 प्रतिशत थी। बोलीदाताओं की वास्तविक लागत, ईंधन की उपलब्धता और संभावित स्थानों की परिस्थितियों को देखते हुए UPCL ने Fixed Charge की सीमा 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा, ताकि Fuel Charge के लिए 25 प्रतिशत तक की गुंजाइश रहे।
उन्होंने कहा कि बिजली की कीमत का आकलन केवल Fixed Charge से नहीं, बल्कि Fixed Charge और Variable/Fuel Cost को मिलाकर बनने वाले कुल टैरिफ से होता है। इस प्रस्ताव की UERC ने जांच और विचार-विमर्श के बाद मंजूरी दी है।
पहली यूनिट 42 और दूसरी 48 माह में
राज्य की बिजली आवश्यकता को पूरा करने के लिए परियोजना की निर्माण समयसीमा भी निर्धारित की गई है। 1320 मेगावाट क्षमता को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के लिए पहली यूनिट के लिए 42 माह और दूसरी यूनिट के लिए 48 माह की समयसीमा रखी गई है।
UJVNL-THDC संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी हुआ विचार
डॉ. सुंदरम ने बताया कि 1320 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पूरी करने के लिए UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी विचार किया गया था। हालांकि THDC, NTPC की सहायक कंपनी है और उसे NTPC की नीतियों के अनुरूप कार्य करना होता है। THDC की मुख्य विशेषज्ञता जल विद्युत और Pumped Storage Projects के क्षेत्र में है तथा अन्य क्षेत्रों में विस्तार के लिए आवश्यक स्वीकृतियां भी जरूरी होती हैं।
इन परिस्थितियों में संयुक्त उपक्रम के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इसके बाद राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरत को देखते हुए प्रतिस्पर्धी निविदा के माध्यम से बिजली खरीद का विकल्प अपनाया गया।
25 वर्षों में ₹1.60 से ₹1.66 लाख करोड़ का संभावित भुगतान
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि 25 वर्षों में करीब ₹1.60 से ₹1.66 लाख करोड़ के भुगतान का उल्लेख एकमुश्त भुगतान नहीं है। यह 25 वर्ष की अवधि में संभावित कुल भुगतान का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकता का आकलन Central Electricity Authority (CEA) की Resource Adequacy Study के आधार पर किया गया है। वास्तविक भुगतान अंतिम टैरिफ, वास्तविक बिजली आपूर्ति, प्लांट की उपलब्धता और अनुबंध की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा।
UERC की मंजूरी के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
डॉ. सुंदरम के मुताबिक, निविदा प्रक्रिया के दौरान कंपनियों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं व्यावहारिक परीक्षण किया गया। आवश्यक बदलावों को UERC के समक्ष रखा गया और आयोग के विचार-विमर्श एवं अनुमोदन के बाद ही उन्हें आगे बढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद की प्रक्रिया को केवल विभागीय स्तर का निर्णय मानना उचित नहीं होगा। इसमें तकनीकी परीक्षण, प्रतिस्पर्धी बोली, वित्तीय मूल्यांकन और स्वतंत्र नियामकीय संस्था की स्वीकृति जैसे विभिन्न चरण शामिल हैं।
प्रमुख सचिव ऊर्जा ने दोहराया कि बिजली खरीद का उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की भविष्य की बिजली जरूरत को सुरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धा तथा नियामकीय स्वीकृति के समग्र संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
