चकराता में ₹12 करोड़ की योजनाओं को लेकर भाजपा के भीतर घमासान, अब जनजाति कल्याण निदेशालय ने धनराशि के अग्रिम वितरण पर लगाई रोक
मंत्री खजान दास के आवास पर प्रदर्शन के बाद आया नया मोड़, मधु चौहान और गीता राम गौड़ ने लगाए थे योजनाओं में अनदेखी व कमीशन के आरोप
देहरादून। चकराता विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों की विकास योजनाओं को लेकर भाजपा के भीतर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। समाज कल्याण मंत्री खजान दास के आवास पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद अब जनजाति कल्याण निदेशालय के एक पत्र ने इस पूरे प्रकरण को फिर चर्चा में ला दिया है।
21 सितंबर 2026 को निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया की ओर से जारी पत्र में देहरादून, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ के जिला समाज कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास योजना के तहत पहले अवमुक्त धनराशि को कार्यदायी संस्था/क्रियान्वयन एजेंसी को अग्रिम आदेश तक आगे अवमुक्त या वितरित न किया जाए।
पत्र में उल्लेख है कि 16 सितंबर 2026 को देहरादून के लिए ₹11 करोड़ 42 लाख 61 हजार, ऊधमसिंह नगर के लिए ₹26 लाख 29 हजार और पिथौरागढ़ के लिए ₹23 लाख 68 हजार की धनराशि जारी की गई थी। तीनों जिलों की कुल राशि करीब ₹11 करोड़ 92 लाख 58 हजार है।
20 सितंबर को मंत्री के आवास पर हुआ था प्रदर्शन
इससे एक दिन पहले, 20 सितंबर को भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने समाज कल्याण मंत्री खजान दास के यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता मधु चौहान ने किया था। उनके साथ दायित्वधारी नेता गीता राम गौड़ सहित अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
इस घटनाक्रम की स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टिंग भी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया था कि चकराता क्षेत्र में एससी/एसटी से संबंधित योजनाओं में भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों की अनदेखी कर कांग्रेस से जुड़े लोगों को काम दिए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान योजनाओं में 15 से 20 प्रतिशत तक कथित कमीशन लिए जाने के आरोप भी लगाए गए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। मंत्री खजान दास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि योजनाओं को संबंधित क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर स्वीकृति दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए कमीशन के आरोपों में एक प्रतिशत भी सच्चाई साबित होती है तो वह मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
अगले ही दिन भाजपा जॉइनिंग कार्यक्रम भी टला
विवाद के अगले दिन, 21 सितंबर को चकराता क्षेत्र से आए करीब 60 लोगों की भाजपा में प्रस्तावित जॉइनिंग भी नहीं हो सकी। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इन लोगों को मधु चौहान और गीता राम गौड़ के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा कार्यालय लाया गया था। मंत्री खजान दास के वहां पहुंचने के बाद कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ा।
हालांकि भाजपा संगठन की ओर से जॉइनिंग नहीं होने की अलग वजह भी बताई गई—रिपोर्टों में प्रदेश संगठन की पूर्व सूचना और प्रदेश अध्यक्ष की उपलब्धता से जुड़ी बात सामने आई है। इसलिए इस घटनाक्रम के कारण को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान हैं।
अब निदेशालय के पत्र ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
ऐसे समय में जब योजनाओं के आवंटन को लेकर भाजपा के भीतर ही सवाल उठ रहे थे, जनजाति कल्याण निदेशालय द्वारा पहले से अवमुक्त धनराशि को आगे वितरित न करने का निर्देश सामने आया है। हालांकि पत्र में इस रोक को कमीशन के आरोपों से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा गया है। पत्र का विषय और निर्देश योजनागत धनराशि के अग्रिम वितरण से संबंधित हैं।
इसलिए फिलहाल यह कहना तथ्यात्मक रूप से उचित होगा कि धनराशि के आगे वितरण पर रोक का आधिकारिक आदेश जारी हुआ है, जबकि कमीशनखोरी और पक्षपात के आरोप अभी आरोप हैं और उनकी स्वतंत्र जांच/पुष्टि सामने नहीं आई है।
चकराता से शुरू हुआ यह विवाद
अब भाजपा के अंदर संगठन, कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।
चकराता से शुरू हुआ यह विवाद अब भाजपा के अंदर संगठन, कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।
