Uttarakhand

उत्तराखंड में बिजली संकट के बीच UPCL के प्रयास, पीक आवर्स में करीब 350 मेगावाट की कमी

जलविद्युत उत्पादन घटने और बढ़ती मांग के बावजूद रोस्टरिंग न्यूनतम रखने का प्रयास, बिजली एक्सचेंज से खरीद जारी

देहरादून। उत्तराखंड में जलविद्युत उत्पादन में कमी और पीक आवर्स के दौरान विद्युत मांग बढ़ने के कारण बिजली उपलब्धता प्रभावित हुई है। वर्तमान परिस्थितियों में राज्य में पीक आवर्स के दौरान औसतन करीब 350 मेगावाट विद्युत की कमी सामने आ रही है। इसके बावजूद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) द्वारा विद्युत रोस्टरिंग को न्यूनतम रखने तथा उपभोक्ताओं को अधिकतम संभव बिजली उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान विद्युत आपूर्ति की स्थिति को लेकर UPCL के प्रबंध निदेशक ने प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिजली संकट के कारणों और आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी दी।
UJVNL से करीब 170 मेगावाट कम उत्पादन
UPCL के अनुसार सितंबर 2025 की समान अवधि की तुलना में इस वर्ष UJVNL से प्राप्त जलविद्युत उत्पादन में करीब 170 मेगावाट की कमी दर्ज की गई है। सितंबर 2025 में पीक आवर्स के दौरान UJVNL का औसत उत्पादन करीब 1,094 मेगावाट था, जो इस वर्ष घटकर लगभग 912 मेगावाट रह गया है।
इसके साथ ही केंद्रीय जलविद्युत परियोजनाओं से भी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 90 मेगावाट कम बिजली प्राप्त हो रही है।
वहीं, टिहरी पम्प स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं होने के कारण पीक आवर्स में करीब 100 मेगावाट विद्युत उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
इन परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव से पीक आवर्स में करीब 350 मेगावाट की कमी उत्पन्न हो रही है।
पीक आवर्स में बिजली खरीद भी चुनौती
UPCL के मुताबिक मौजूदा स्थिति में केवल राज्य के विद्युत उत्पादन में कमी ही चुनौती नहीं है, बल्कि पीक आवर्स के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर भी बिजली की उपलब्धता सीमित है।
दिन के समय सौर ऊर्जा उपलब्ध होने के कारण ऊर्जा एक्सचेंज में बिजली अपेक्षाकृत पर्याप्त और कम कीमत पर उपलब्ध रहती है। वहीं शाम और रात के पीक आवर्स में मांग बढ़ने के साथ उपलब्धता कम होने से बिजली की कीमत काफी बढ़ जाती है।
इसके बावजूद UPCL द्वारा ऊर्जा एक्सचेंज के माध्यम से लगातार बिजली खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश में विद्युत कटौती को यथासंभव न्यूनतम रखा जा सके।
प्राथमिकता के आधार पर की जा रही रोस्टरिंग
UPCL के अनुसार आपातकालीन परिस्थितियों में रोस्टरिंग को प्राथमिकता के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर निर्धारित किया जा रहा है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत—
कुमाऊं एवं गढ़वाल क्षेत्र के फर्नेस/स्टील फर्नेस को प्राथमिकता के आधार पर रोस्टरिंग में शामिल किया जा रहा है।
इसके बाद ग्रामीण कुमाऊं एवं गढ़वाल क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार रोस्टरिंग की जा रही है।
इसके बाद छोटे नगरों में जरूरत के अनुसार रोस्टरिंग की जा रही है।
UPCL का कहना है कि रोस्टरिंग का उद्देश्य विद्युत आपूर्ति को अनावश्यक रूप से बाधित करना नहीं, बल्कि सीमित विद्युत संसाधनों का संतुलित एवं अधिकतम उपयोग करते हुए अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराना है।
मेंटेनेंस कार्यों को भी रोस्टरिंग अवधि में करने के निर्देश
सामान्य विद्युत आपूर्ति के दौरान अनावश्यक व्यवधान को कम करने के लिए फील्ड इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित रखरखाव कार्यों को संभव हो तो रोस्टरिंग अवधि में ही किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर कुछ कार्यों को स्थगित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा पीक आवर्स में हाइड्रो जनरेटरों को अधिकतम संभव सीमा तक शेड्यूल करने तथा सौर ऊर्जा उपलब्धता के घंटों में तकनीकी रूप से संभव सीमा तक जलविद्युत उत्पादन को कम रखने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग पीक डिमांड के समय करना है।
शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश
UPCL प्रबंध निदेशक ने सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रोस्टरिंग के दौरान उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण किया जाए। अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विद्युत आपूर्ति की स्थिति की लगातार निगरानी करने और उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वर्तमान विद्युत स्थिति, वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों की सीमाओं की सही एवं तथ्यात्मक जानकारी आमजन तक पहुंचाने में सहयोग करें, ताकि बिजली संकट को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न फैले।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में निदेशक (वितरण एवं परियोजना), कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) सहित UPCL के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे