देहरादून

27 सितंबर को देहरादून में सवर्ण सम्मेलन, विभिन्न राज्यों से जुटेंगे समानता के पक्षधर

देहरादून। उत्तराखंड समानता पार्टी की ओर से आगामी 27 सितंबर को हरिद्वार रोड स्थित राजधानी बैंक्वेट हॉल में सवर्ण सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन को अखिल भारतीय समानता मंच ने भी समर्थन दिया है। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में उत्तराखंड के साथ ही अन्य राज्यों से समानता के पक्षधर बुद्धिजीवी, अधिवक्ता, पूर्व पुलिस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे।

उत्तराखंड समानता पार्टी और अखिल भारतीय समानता मंच की ओर से जातिगत आरक्षण की समीक्षा, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून में किए गए विभिन्न संशोधनों तथा शिकायतों को आर्थिक लाभ से जोड़ने संबंधी प्रावधानों पर चर्चा की जाएगी। आयोजकों का आरोप है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग सवर्ण समाज के उत्पीड़न के लिए किया जा रहा है। वहीं, यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर भी सम्मेलन में चर्चा प्रस्तावित है।

अखिल भारतीय समानता मंच का कहना है कि सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए संबंधित प्रावधानों की समीक्षा और आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए। मंच के अनुसार वह इन मुद्दों को लेकर लगातार प्रयास करता रहा है। उत्तराखंड समानता पार्टी भी क्षेत्रीय मुद्दों के साथ इन विषयों पर अपनी आवाज उठाती रही है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंदन सिंह नेगी ने बताया कि सम्मेलन में प्रदेश के बाहर से भी कई बुद्धिजीवी, अधिवक्ता और पूर्व भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं और आम लोगों में सम्मेलन को लेकर उत्साह है। देहरादून के बाद राज्य के अन्य जनपदों में भी जनजागरण के लिए सम्मेलन आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं।

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में एडवोकेट पंकज त्रिपाठी, स्वामी आनंद स्वरूप, पूर्व आईपीएस अधिकारी जुगल किशोर तिवारी, अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी.एन. साहू, ठाकुर रूमित सिंह, दिल्ली से यू.एस. राणा, मध्यप्रदेश से एडवोकेट अनिल मिश्रा, रवि नेगी और त्रिभुवन शर्मा सहित अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।

गढ़वाल और कुमाऊं मंडल से पार्टी पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में आम लोगों के भी सम्मेलन में पहुंचने की बात कही गई है।

पार्टी के संगठन सचिव श्रीधर नैथानी ने युवाओं से सम्मेलन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि जातीय कानूनों में संशोधन और आरक्षण की समीक्षा जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा एवं जनभागीदारी आवश्यक है।

पार्टी के मीडिया प्रभारी वी.के. धस्माना ने भी जातीय कानूनों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए संबंधित प्रावधानों में संशोधन की मांग दोहराई।