केंद्र सरकार ने लिए तीनों कृषि कानून वापस,,, सोसल मीडिया पर छाई लोगों की प्रतिक्रियाएं,,,

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नई दिल्लीः केन्द्र ने लिए तीनों कृषि कानून वापस- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में तीनों विवादित कानून वापस लेने की घोषणा की है।राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रकाश पर्व के पवित्र अवसर पर देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश के किसानों की बेहतरी के लिए सरकार तीन कृषि कानूनों को लाई थी जिसका उद्देश्य देश के किसानों की आर्थिक दशा सुधारनें का था लेकिन सरकार कई प्रयत्नों के बावजूद किसानों के एक धड़े को किसान कानूनों के फायदे नही समझा पाई अतः सरकार विनम्रता के साथ इन तीनों कृषि कानूनों को संसद के आगामी सत्र में वापस लाने का प्रस्ताव संसद मे ले आयेगी।इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लघु तथा सीमांत किसानों को किसान सम्मान निधि देने तथा किसानों के हित मे कृषि बजट को पांच प्रतिशत तक बढाने के उनकी सरकार द्वारा उठाया गया कदम बताया। –

 

 

सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है. ऐसे में  पीएम नरेंद्र मोदी ने आज देश के नाम संदेश में साफ कर दिया है कि केंद्र इन तीनों कानूनों को वापस ले रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि हम किसानों को समझा नहीं सके इसलिए इन कानूनों को वापस ले रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि कानून वापस ले रहे हैं लेकिन इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए. कृषि अर्थशास्त्रियों ने, वैज्ञानिकों ने, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया.

उन्होंने आगे कहा- हमारी सरकार, किसानों के कल्याण के लिए, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, देश के हित में, गांव गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए, पूरी सत्य निष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से ये कानून लेकर आई थी.

पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान इस बात पर जोर दिया कि कैसे सरकार की पहल से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है. पीएम मोदी ने कहा, “हमने अपने ग्रामीण बाजारों को मजबूत किया है. छोटे किसानों की मदद के लिए कई योजनाएं लाई गई हैं. किसानों के लिए बजट आवंटन पांच गुना बढ़ गया है. हमने सूक्ष्म सिंचाई के लिए भी धन दोगुना कर दिया है.” हजारों किसान, जिनमें से ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं, 28 नवंबर, 2020 से दिल्ली के कई सीमावर्ती बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं, तीन कृषि कानूनों को पूरी तरह से निरस्त करने और अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं. ऐसे में हम उन्हें समझाने में असमर्थ रहे.

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