उत्तराखंड की लोकपर्व इगाश पर देहरादून DM ने किया प्रतिभाग, खेला उत्तराखंड का पारम्परिक भेलो 

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उत्तराखंड के लोकपर्व इगाश को लेकर टिहरी जिले में खासा उत्साह है। खासतौर पर युवाओं के बीच इगाश को लेकर काफी उत्साह है। दीपावली तो पूरे देश में मनाई जाती है लेकिन इगाश उत्तराखंड का एक बड़ा लोकपर्व है। टिहरी जिला मुख्यालय में भी बौराड़ी में सामूहिक भैला कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। घनसाली, चंबा और अन्य स्थानों में भी इगाश पर्व मनाया जा रहा है। दीपावली के 11 दिन बाद इगाश मनाया जाता है। 16वीं सदी में गढ़वाल रियासत के महिपत शाह के सेनापति वीर भड़ माधो सिंह भंडारी के तिब्बत युद्ध में जीत हासिल करने के बाद श्रीनगर लौटने की खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है। वरिष्ठ साहित्यकार महिपाल िसंह नेगी ने बताया कि वीर भड़ माधो सिंह भंडारी को महिपत शहा ने तिब्बतियों का हमला रोकने के लिए युद्ध में भेजा था और वह दीपवाली में घर नहीं आ पाये थे। किसी अनिष्ट की आशंका से उस दौर में पूरे राज्य में उस दिन दीपावली नहीं मनाइ गई। लेकिन जब दीपावली के 11वें दिन माधो सिंह भंडारी श्रीनगर पहुंचे तो उनके गांव आने की खुशी में यह इगाश बग्वाल मनाई जाती है। वरिष्ठ पत्रकार अनुराग उनियाल ने बताया कि इगाश बग्वाल को लेकर पिछले कुछ वर्षो के दौरान युवा काफी उत्साहित हैं। खासतौर पर इगाश मनाने के लिए युवा अपने गांवों की ओर जा रहे हैं। इस मुहिम में युवाओं की भागीदारी से उम्मीद है कि आने वाले समय में इगाश पर्व उत्तराखंड का प्रमुख लोकपर्व बनकर उभरेगा और अपने गांव और संक्ृति को जानने का मौका आने वाली पीढ़ी को मिल सकेगा।

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