चाय बाग भूमि पर अवैध खरीद–फरोख्त, फर्जी हस्तांतरण रिपोर्ट और अधिकारियों की संलिप्तता की उच्च स्तरीय जांच की मांग
दिनांक 16 मई 2023 को जिलाधिकारी देहरादून कार्यालय से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) श्री शिव कुमार बर्नवाल द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया, जिसमें तहसील विकासनगर के ग्राम अंबाड़ी, एनफील्ड ग्रांट समेत लगभग 8 ग्रामों के विभिन्न खसरा नंबरों को चाय बाग भूमि श्रेणी में मानते हुए उ.प्र. अधि. जो. सी. आरोपण 1960 की धारा 6(1) घ एवं 6(2) के प्रावधानों के तहत भूमि क्रय–विक्रय पर रोक लगाई गई थी।
◼ रोक के बावजूद बड़े पैमाने पर रजिस्ट्री दर्ज
इस प्रतिबंध के बाद भी, उप निबंधक कार्यालय विकासनगर (प्रथम एवं द्वितीय) से कुल 41 अवैध विलेख पत्र दर्ज किए गए, जिनका विवरण निम्न है—
- रसूलपुर (एनफील्ड ग्रांट) – 04 रजिस्ट्री
- बाबूगढ़ (एनफील्ड ग्रांट) – 12 रजिस्ट्री एवं 03 गिफ्ट डीड
- अंबाड़ी – 13 रजिस्ट्री, 04 गिफ्ट डीड, 02 मॉर्टगेज, 02 बैंक फाइल, 01 एग्रीमेंट
◼ 12 अवैध दाखिल–खारिज भी दर्ज करवाए गए
तहसीलदार/नायब तहसीलदार के समक्ष फर्जी ’लेखपाल हस्तांतरण रिपोर्ट’ बनाकर निम्न पटवारियों द्वारा 12 मामलों में दाखिल–खारिज करवाए गए—
रसूलपुर (एनफील्ड ग्रांट) – 02
- आनंद सिंह (1)
- सुश्री/श्रीमती डिम्पल (1)
बाबूगढ़ (एनफील्ड ग्रांट) – 03
- आनंद सिंह (1)
- सुश्री/श्रीमती डिम्पल (1)
- नरेंद्र सिंह (1)
अंबाड़ी – 07
- नरेंद्र सिंह (5)
- सुश्री/श्रीमती डिम्पल (1)
- अज्ञात (1)
◼ जांच में सामने आए अधिकारी
तहसीलदार द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में निम्न अधिकारी/कर्मचारी संलिप्त पाए गए—
- श्री सुनील कुमार, रजिस्ट्रेशन क्लर्क
- श्रीमती भावना भट्ट, रजिस्ट्रेशन क्लर्क
- श्रीमती अपूर्वा सिंह, सब-रजिस्ट्रार विकासनगर
◼ कई शिकायतों के बावजूद जांच में देरी
प्रकरण की शिकायत जिलाधिकारी देहरादून, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एवं अन्य सक्षम प्राधिकरणों को दिनांक 15/05/2025, 22/05/2025 और 28/05/2025 को की गई।
इसके बाद, जिलाधिकारी श्री सविन बंसल द्वारा 29 जुलाई 2025 को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को जांच अधिकारी नामित करते हुए 15 दिवस में सुस्पष्ट जांच आख्या प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए गए।
किन्तु लगभग चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच पूर्ण नहीं की गई है और उसे “गतिमान” बताया जा रहा है।
CM हेल्पलाइन की शिकायत (शिकायत संख्या उपलब्ध) पर भी अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
◼ गंभीर अनियमितताओं पर उच्च स्तरीय कार्रवाई की मांग
इन सभी तथ्यों के आधार पर स्पष्ट है कि—
- चाय बाग भूमि पर प्रतिबंधित होने के बावजूद बड़े स्तर पर अवैध खरीद–फरोख्त हुई
- फर्जी एवं कूटरचित लेखपाल हस्तांतरण रिपोर्ट बनाकर दाखिल–खारिज करवाए गए
- अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका गहरी है
- जांच में देरी से संलिप्त लोगों को संरक्षण मिल रहा है
◼ हमारी मांगें
इस प्रेस वार्ता के माध्यम से मांग की जाती है कि—
- अवैध विलेखों में संलिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन किया जाए।
- फर्जी हस्तांतरण रिपोर्ट बनाने वाले पटवारियों के विरुद्ध विभागीय अभियोग पंजीकृत किए जाएं।
- पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच / SIT गठित की जाए।
- जांच को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पूर्ण कराया जाए।
