Uttarakhandदेहरादून

*जैमर तो थे 5-जी नेटवर्क पर नहीं लगा सकते लगाम* डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

              उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) स्नातक स्तरीय परीक्षा में सभी 445 केंद्रों पर जैमर तो लगे थे, लेकिन रोकने में नाकाम थे। इसे एक बड़ी तकनीकी खामी माना
जा रहा है, जैमर 4-जी नेटवर्क रोकने वाले थे।                      विशेषज्ञों का कहना है कि ये 5-जी नेटवर्क को नहीं रोक सकते। आयोग ने स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक होने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे। केंद्र सरकार के अधीन एक कंपनी ने जैमर लगाए थे। पहले आयोग केवल संवेदनशील केंद्रों पर इन्हें लगवाता था लेकिन इस बार सभी 445 केंद्रों पर जैमर लगे थे। इनकी पड़ताल की तो पता चला कि ये सभी जैमर 4-जी नेटवर्क तक को रोकने वाले थे। विशेषज्ञों से बात की गई तो उनका कहना है कि ऐसे जैमर 5-जी नेटवर्क को रोकने में नाकाम हैं।
प्रदेश के ज्यादातर शहरों में 5-जी नेटवर्क चल रहा है। ये जैमर इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) की ओर से लगाए गए हैं।

4-जी नेटवर्क आमतौर पर 700 मेगाहर्ट्स, 1800 मेगाहर्ट्स, 2300 मेगाहर्ट्स बैंड पर कामकरता है।

5-जी नेटवर्क इससे कहीं ज्यादा ऊंची फ्रीक्वेंसी बैंड
(जैसे 3300 मेगाहर्ट्स, 3500 मेगाहर्ट्स, एमएम वेव : 24 गीगाहर्ट्स तक) पर काम करता है। जैमर एक तय फ्रीक्वेंसी रेंज को ही जाम करता है। लिहाजा, यह 5-जी नेटवर्क को जाम नहीं कर सकता।आयोग के सचिव का कहना है कि उनके पर्यवेक्षक ने मौखिक तौर पर परीक्षा केंद्र के कक्ष-22 में जैमर न चलने की शिकायत की थी। सोमवार को जब उनकी रिपोर्ट आई तो उसमें कक्ष-9 में जैमर के काम न करने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। यह तो तय है कि जिस कक्ष से पेपर बाहर आया, वहां जैमर काम नहीं कर रहा था। आयोग ने इस संबंध में ईसीआईएल को पत्र भेजा है।हमने
पूर्व में केंद्र को पत्र भेजा था, जिस पर कैबिनेट सेक्रेटरी ने ईसीआईएल को 4-जी, 5-जी अपडेटेड जैमर लगाने के निर्देश दिए थे। हमारे अधिकतर परीक्षा केंद्रों पर 4-जी जैमर लगे थे।
कुछेक पर 5-जी जैमर थे। जहां परीक्षा का पेपर बाहर आया, वहां जैमर काम नहीं कर रहा था। इसकी जांच की जा रही है। यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर बाहर आना पहेली बना हुआ है। एक तो साफ हो गया कि जैमर काम नहीं कर रहा था लेकिन दूसरा सवाल यह है कि जब मोबाइल
प्रतिबंधित था तो भीतर फोटो कैसे खींचा गया। क्या किसी ने आरोपी खालिद की मदद की।आयोग ने मोबाइल समेत सभी तरह की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर सख्त प्रतिबंध लगाया हुआ था।सभी अभ्यर्थियों को सख्त जांच से गुजरने के बाद ही परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश दिया जा रहा था। अपने पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने यह स्वीकार भी किया है कि परीक्षा कक्ष के भीतर से फोटो खींचकर बाहर भेजी गई है। सवाल यह उठ रहा है कि भीतर मोबाइल किसका था? क्या इसमें कोई और भी मिला हुआ है? पेपर भेजने का आरोपी अभ्यर्थी खालिद अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। आयोग भी इस सवाल का जवाब तलाशने में जुटा है कि खालिद की मदद किसने की।उत्तराखंड में पेपर लीक मामले से युवाओं में भारी नाराजगी दिखाई दे रही है. बीती रोज स्नातक स्तरीय परीक्षा हुई थी.

जिसके कुछ प्रश्न पत्र भी परीक्षा शुरू होने के तुरंत बाद सामने आए. परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठने पर एसएसपी और यूकेएसएसएससी अध्यक्ष जी ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता की. जिसमें उन्होंने कहा कि परीक्षा में पूरी तरह से सुचिता बरती गई है. उसके बाद आज भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का
आरोप लगाते हुए सैकड़ों की संख्या में बेरोजगार युवा देहरादून के परेड मैदान में जमा हो गए. गुस्साए बेरोजगारों ने पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया.उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले
युवाओं ने 'पेपर चोर गद्दी छोड़' जैसे नारे लगाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया. बेरोजगारों ने आज सचिवालय कूच करने का प्लान बनाया था, लेकिन बाद में संघ के नेताओं ने
युवाओं से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से परेड ग्राउंड के पास सड़क पर ही धरने पर बैठने का आह्वान किया. इस मामले पर उत्तराखंड बेरोजगार संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष  ने कहा कि जिस तरह प्रशासन ने धारा 163 लागू करके युवाओं को डराने की कोशिश की है, यह लोकतंत्र का गला घोटने के समान है और
युवाओं के मुद्दों को खत्म करने की कोशिश भर है. उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की रविवार कोआयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के तीन पन्ने इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के मामले में मुख्य आरोपित
खालिद मलिक की करतूतें अब सामने आ रही हैं।जांच में खुलासा हुआ है कि खालिद ने आयोग की परीक्षा के लिए चार अलग-अलग पहचान के साथ आनलाइन आवेदन किए थे। इन चारों आवेदन पत्रों में पिता का नाम, मोबाइल नंबर और यहां तक कि फोटो भी अलग-अलग लगाए गए थे। इसके बाद आयोग ने खालिद के भरे गए सभी आवेदन पत्रों की जांच की। चौंकाने वाली बात यह रही कि सभी में अलग-अलग जानकारियां और फोटो चस्पा किए गए थे। आयोग की ओर से दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अधिकांश नंबर किसी और के निकले या फिर बंद मिले। इससे आयोग का
शक और मजबूत हो गया। उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं का यह संघर्ष उनके अधिकारों और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी आवाज बुलंद करने का संकल्प और सरकार की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। देखते हैं आगे क्या विकास होता है और युवाओं की मांगें पूरी होती हैं या नहीं।
*लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
Uma Shankar Kukreti