महाकुम्भ 2021 हरिद्वार में पर्यावरण समिति को दिशाधारा देगा-शांतिकुंज संस्थान

हरिद्वार /२३ जनवरी : देव संस्कृति विश्वविद्यालय महाकुम्भ 2021 को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के माध्यम से हुआ। दीप प्रज्वलन देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या जी के साथ-साथ आर.एस.एस. के सहसर कार्यवाहक डाॅ. कृष्ण गोपाल जी, उत्तराखण्ड प्रदेश संयोजक पर्यावरण सरंक्षण श्री रघुवीर सिंह रावत, संयोजक पर्यावरण सरंक्षण गतिविधि श्री गोपाल आर्य, प्रमुख अवधूत मण्डल, महंत स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश के साथ पर्यावरण समिति महामंत्री मनोज गर्ग आदि द्वारा किया गय। इस बैठक में कुम्भ को जीरों कार्बन फुट प्रिंट जोन बनाने हेतु विचार मंथन हुआ। इसके साथ ही पर्यावरण को लेकर बडे स्तर पर कार्य करने हेतु योजना बनी। इसमें उत्तराखण्ड सरकार, शांतिकुंज, देव संस्कृति विश्वविद्यसालय के साथ आर.एस.एस. व हरिद्वार के प्रमुख सम्मानित व धार्मिक संगठन,

 

एन.जी.ओ.,शैक्षणिक संस्थानों इत्यादि की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस महत्वपूर्ण योजना को समन्वित व कार्यन्वित करने के लिए सर्वसम्मति से डाॅ. चिन्मय पण्ड्या को अध्यक्ष घोषित किया गया। प्रस्तुत कार्यक्रम की प्रस्तावना को श्री गोपाल आर्य द्वारा समझाया गया उन्होंने इसके मूल उददेश्य व अलग-अलग सोपानों की भूमिका को स्पष्ट किया। इको ब्रिक्स द्वारा पर्यावरण को पालीथिन मुक्त करना वन टाईम यूज प्लास्टिक को एक पानी,काल्ड ड्रिन्क की बोतल में इकटठा कर उससे पार्को, इको बाल्स आदि के लिए इस्तेमाल कर प्रयोग में लाना। श्री रघुवीर सिंह रावत द्वारा पूरी समिति का परिचय दिया गया एवं कार्य योजनाओं पर अपने विचार व्यक्त किये गये। महन्त स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश जी द्वारा सामाजिक संगठनों के कार्य प्रणाली को समझाया गया। प्रस्तुत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ.कृष्ण गोपाल सह सरकार्यवाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रहे। इन्होंने शांतिकुंज के सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यो की प्रशंसा की एवं इस कुम्भ में शांतिकुंज की प्रमुख भूमिका को लेकर अपने विचार दिये। इनके अनुसार कुम्भ 2021 को पर्यावरण की दृष्टि से सरंक्षित करना है। भारतीय संस्कृति के पर्यावरण पक्ष को ध्यान में रखते हुए इस कुम्भ को आयोजित किया जाना है। कार्यक्रम को मुख्य दिशा देते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्यावरण सरंक्षण के साथ ही सभी पर्व व त्योहारों की कल्पना की गयी है। इस क्रम में कुम्भ सबसे बड़ा पर्व है। इस पर्व में पूरे भारत ही नही अपितु विदेशों से भी लोग आते है। प्राचीन समय में जिस प्रकार पृथ्वी, जल इत्यादि का सरंक्षण दिया जाता था। ठीक आज उसी प्रकार के नियोजन की आवश्यकता है। इस सन्दर्भ में इस महा कुम्भ को जीरों कार्बन फुट प्रिन्ट बनाने को लेकर डाॅ. पण्ड्या ने एक योजना सभी के सामने रखी। इस हेतु वर्तमान में चल रहे शांतिकुंज के प्रमुख अभियान आपके द्वार पहुँचा हरिद्वार को लेकर, घर-घर कुम्भ, घर-घर यज्ञ, घर-घर संस्कार की विश्वस्तरीय कार्य योजना के मूल स्वरूप को स्पष्ट किया। उनके अनुसार यह योजना 14 जनवरी से प्रभावी है। इस योजना को लेकर ही हरिद्वार में पर्यावरण सरंक्षण समिति कार्य को नई दृष्टि मिल सकती है कार्यक्रम समापन पर डाॅ मनोज गर्ग द्वारा सभी संगठनों एवं प्रतिभागियों का आभार ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम में यू.सी. जैन, राकेश जैन, डाॅ. विनोद, श्री. विजय पाल, श्री सुयेश रावत, श्री संजय चतुर्वेदी, श्री रजनीकांत शुक्ला, डाॅ. अरूणेश पाराशर, डाॅ. उमाकांत इंदौलिया,डाॅ. स्मिता वशिष्ठ,श्री अश्विनी शर्मा, डाॅ. असीम कुलश्रेष्ठ, श्री प्रखर सिंह पाल, रामनाथ प्रजापति इत्यादि लोग उपस्थित थे।

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