उर्गम घाटी के श्री जाख राजा ने बर्फीले रास्तों को पार कर अपने बड़े भाई वजीर से की भेंट

रिपोर्ट रघुबीर नेगी

उर्गम घाटी के आराध्य श्री जाख राजा की रथयात्रा भूमि क्षेत्रपाल घंटाकर्ण के सानिध्य में डुमक – कलगोठ पहुंची। अपने बडे भ्राता डुमक बजीर से मिलने दो दिनों तक बडे भ्राता की नगरी डुमक में रात्रि विश्राम करेंगे। 11 वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद जाख राजा उर्गम देर शाम डुमक गांव पहुंचे जहां ज्येष्ठ भ्राता बजीर एवं डुमक के ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। 18 किमी पैदल बर्फीले रास्ते बर्फीली हवायें हाड कपा देने वाली ठंड के बीच डुमक वजीर नन्दा स्वनूल नाग देवता एवं कलगोठ कौवधुड़िया महाराज से मिलने पहुंचे। दो दिवसीय प्रवास अपनी धियाणियों बडे भाई वजीर नन्दा स्वनूल से मिलकर कलगोठ बेहद भावुक विदाई। भाई के दरबार से विदा होना बडा कठिन होता धियाणियां तैयार नही थी।
अपने मायके के आराध्य को विदा करने के लिए वजीर के लिए भी मुश्किल हो जाता है, छोटे भाई को विदा करना समझा बुझा कर घंटाकर्ण ने कलगोठ जाने की आज्ञा मांगी और जल्द ग्रामीणों को वजीर देवता की रथयात्रा आयोजित करने अनुरोध किया। बडे भ्राता से विदा होकर देर शाम कलगोठ पहुंचे जहां भूमि क्षेत्र पाल कौधुड़िया महाराज एवं ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया दो दिन कौधुड़िया भूमियाल के सानिध्य में रहकर उर्गम घाटी लौट जायेंगे। पैनखंडा पट्टी समेत गढ़वाल के विभिन्न गांवों में जाख राजा की रथयात्रा होती है अधिकांश गांवो में जाख राजा की रथयात्रा 6 माह की होती है जिसे देवरा यात्रा कहा जाता है। उर्गम घाटी के जाख देवता की रथयात्रा केवल 15 से 20 दिनों की होती है जो केवल उर्गम घाटी के गांवों एवं डुमक – कलगोठ तक होती है।

60 भाई जाखों में सबसे ज्येष्ठ भ्राता सूदूरवर्वी क्षेत्र डुमक गांव में है तथा सबसे छोटे भ्राता का मंदिर चनाप घाटी के थैंग गांव में विराजमान है। अन्य पैनखंडा समेत विभिन्न गांवों में है। अधिकतर गांवों में जाख राजा वहां के भूमि क्षेत्रपाल है जो राजस्व कर वसूलने जाते हैं। 4 वर्षों के उपरांत उर्गम घाटी के भूमियाल घंटाकर्ण की छत्रछाया में जाख राजा की रथयात्रा शुरू हुई। इस बार जाख राजा की रथयात्रा उर्गम घाटी के युवा पीढ़ी के कन्धों पर है जो आज भी अपनी अनमोल विरासत को संवार रहे हैं ‌ इस अवसर पर पश्वा लक्ष्मण नेगी, भवान सिह पवांर चन्द्र प्रकाश हर्षवर्धन चौहान, रितिक चन्द्र ,मोहन, अभिषेक, पुष्कर, संदीप चौहान, मान सिंह अध्यक्ष, राजेन्द्र रावत गणियां, कुवंर सिह समेत उर्गम घाटी के सभी जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

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