देहरादून

पेपर लीक पर सीबीआई जांच की घोषणा के बाद नया संकट: शिक्षक नेता ने शिक्षा मंत्री को चुनावी चुनौती दी

 

श्री केसर सिंह रावत शिक्षक की शिक्षा मंत्री को खुली चुनौती।

सबलाइन

धामी सरकार के लिए बेरोजगारों के बाद अब शिक्षकों का असंतोष बना सिरदर्द

खबर का सार

पेपर लीक प्रकरण पर आंदोलित युवाओं की मांग मानते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच की घोषणा कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की, मगर इसी बीच शिक्षकों के असंतोष ने नया मोर्चा खोल दिया। प्रमोशन में देरी से नाराज़ शिक्षक नेता केसर सिंह रावत ने शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के खिलाफ 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी है। लगातार बढ़ते विरोध से शिक्षा विभाग सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता दिख रहा है।

 

प्रमोशन न मिलने से आहत टिहरी के मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल का इस्तीफा, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

प्रमुख बिंदु

  • इस्तीफे की पुष्टि: सीईओ एसपी सेमवाल ने शिक्षा सचिव रविनाथ रमन को पत्र लिखकर इस्तीफे की पुष्टि की।
  • प्रमोशन विवाद: फरवरी 2025 में अपर निदेशक पद पर प्रमोशन तय था, लेकिन 8 महीने बीतने के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
  • सेमवाल का आरोप: “हर अर्हता पूरी करने के बावजूद हक नहीं मिला, बार-बार आश्वासन झूठे साबित हुए।”
  • मानसिक पीड़ा और असंतोष: लगातार उपेक्षा से निराश होकर इस्तीफे का निर्णय।
  • शिक्षक आंदोलन की पृष्ठभूमि:
    • 25 हजार से अधिक शिक्षक आंदोलनरत।
    • मांगें: प्रधानाचार्य पद पर सीधी भर्ती रद्द, प्रमोशन प्रक्रिया तेज, तबादला नीति लागू।
    • खून से लिखे 20 हजार पत्र प्रधानमंत्री को भेजने की तैयारी।
  • राजनीतिक असर: अधिकारी और शिक्षक वर्ग की नाराज़गी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

देहरादून: टिहरी जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) एसपी सेमवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की पुष्टि उनके द्वारा राज्य के शिक्षा सचिव रविनाथ रमन को लिखे गए पत्र से हुई है। उन्होंने प्रमोशन न मिलने के कारण इस्तीफा दिया है।

जानकारी के अनुसार टिहरी गढ़वाल जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल ने निराश होकर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में साफ तौर पर लिखा है कि वे लंबे समय से प्रमोशन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन आठ महीने गुजर जाने के बावजूद उनको पद्दोनति नहीं मिल पाई है। फरवरी 2025 में उनका अपर निदेशक पद पर प्रमोशन होना तय था, मगर विभागीय प्रक्रियाओं की धीमी गति और लगातार उपेक्षा से निराश होकर उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।

हर अर्हता पूरी करने के बावजूद हक नहीं मिला

उन्होंने पत्र में लिखा है कि “हर अर्हता पूरी करने के बावजूद मुझे हक नहीं मिला। बार-बार आश्वासन दिए गए, लेकिन प्रमोशन की फाइल आगे नहीं बढ़ी। इससे मानसिक पीड़ा और असंतोष पैदा हुआ, जिसके चलते मुझे इस्तीफा देना पड़ा।” एसपी सेमवाल का इस्तीफा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या विभागीय प्रमोशन प्रणाली इतनी सुस्त है कि अधिकारी को पद छोड़ना पड़े? क्या शिक्षकों और अधिकारियों की लगातार बढ़ती नाराज़गी सरकार के लिए चुनौती बनेगी? आने वाले दिनों में इसका असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों पर देखने को मिल सकता है।

शिक्षकों का आंदोलन नहीं ले रहा रुकने का नाम

गौरतलब है कि इन दिनों उत्तराखंड में शिक्षक वर्ग भी आक्रोशित है। राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े करीब 25 हजार से ज्यादा शिक्षक आंदोलनरत हैं। उनकी तीन सूत्रीय प्रमुख मांगें हैं— प्रधानाचार्य पद पर सीधी भर्ती रद्द करना, प्रमोशन की राह खोलना और तबादला प्रक्रिया शुरू करना। आंदोलनकारी शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन के साथ ही शिक्षा मंत्री आवास घेराव की चेतावनी दी है। इसके अलावा प्रधानमंत्री को अपने खून से लिखे 20 हजार पत्र भेजने की घोषणा भी की गई है। शिक्षक आंदोलन और अधिकारियों की नाराज़गी के बीच शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

https://www.facebook.com/share/v/175uqCrsVN/

Uma Shankar Kukreti