केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को “वातायन अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान” मिलने पर PRSI देहरादून चैप्टर ने दी बधाई

देहरादून। केन्द्रीय मंत्री निशंक को ’वातायन अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान’ मिलने पर पीआरएसआई देहरादून चैप्टर ने बधाई दी है। पीआरएसआई देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष अमित पोखरियाल, सचिव अनिल सती और कोषाध्यक्ष सुरेश भट्ट ने केन्द्रीय मंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक को वातायान अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान मिलने पर पूरे पीआरएसआई परिवार की ओर से बधाई दी, उन्होंने कहा कि डा. निशंक का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना हमारे देश और विशेषकर हमारे राज्य उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी आफ इंडिया, देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष अमित पोखरियाल ने कहा कि निशंक ने देश के करोड़ों युवाओं को समर्पित किया है पुरस्कार।

देश-दुनिया में ख्यातिलब्ध साहित्यकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गयी। उन्हें हिन्दी साहित्य लेखन में विशिष्ट योगदान के लिए ’वातायन’ अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान (वातायन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड) से अलंकृत किया गया। डाॅ. निशंक ने इस सम्मान को पूरे हिंदुस्तान का सम्मान बताते हुए कहा कि यह सम्मान मेरे देश के उन करोड़ों युवाओं को समर्पित है, जो मेरे देश को पुनः विश्वगुरु बनाने की ओर अग्रसर हैं। भारतीय समय के अनुसार शाम 8.30 बजे आरंभ हुए इस वर्जुअल कार्यक्रम में अनेक देशों के विद्वानों, लेखकों, कवियों और शिक्षाविदों ने सहभागिता की।

लंदन में 21 नवम्बर को आयोजित वातायन-यूके सम्मान समारोह में डाॅ. निशंक को सम्मानित किया। डाॅ. निशंक के साहित्य में पूरा पहाड़़ और वहां की संवेदनाएं झलकती हैं। उनकी कहानियों और उपन्यासों के पात्र पूंजीपति न होकर किसान और शिक्षक जैसे साधारण लोग हैं। 75 से अधिक पुस्तकों की रचना करने वाले और 15 से अधिक देशों में सम्मानित हो चुके डाॅ. निशंक का साहित्य उच्च कोटि का है। अनेक भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है। उनके साहित्य में आम आदमी की पीड़ा है। डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने इस पुरस्कार को हिंदुस्तान का सम्मान करार देते हुए कहा कि यह पुरस्कार मेरे देश के उन युवाओं को समर्पित है, जो मेरे भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सोच विस्तारवादी नहीं रही, वह शांति का समर्थक रहा है। विश्व में शांति और ज्ञान का रास्ता भारत से होकर गुजरता है। हमारी राष्ट्रीय शिक्षा की नींव इसी पर है।

पुरस्कार प्रदान करने वाली वातायन संस्था और वैश्विक हिंदी परिवार के हिंदी के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के कार्यों की सराहना करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. निशंक ने कहा कि हिंदी ऐसी समृद्ध भाषा है, जिसमें नौ लाख शब्दों का शब्दकोश है। हिंदी एक विचार, उल्लार और संस्कार है। यह भाषा पूरे विश्व में अपना परचम लहराने जा रही है। इस भाषा के लिए कार्य करने वाली संस्थाएं बधाई की पात्र हैं।

पीआरएसआई देहरादून चैप्टर ने वातायन संस्था की संस्थापक दिव्या माथुर की भी प्रशंसा की जो ब्रिटेन में रहकर साहित्य पर विशेष कर हिंदी साहित्य पर इतना काम कर रही हैं.

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