काशीपुर के 50 अनाथ बच्चों का सहारा बनीं उर्वशी दत्त बाली
काशीपुर। प्रतापपुर, रामनगर रोड स्थित हॉस्टल में रह रहे 50 बेसहारा बच्चों की ज़िंदगी इन दिनों नई दिशा पकड़ रही है। इन बच्चों में किसी के सिर से मां का साया उठ गया, तो किसी ने बहुत पहले ही पिता को खो दिया, कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें हालात ने घर-परिवार से अलग कर दिया। इन मासूमों के भविष्य को संवारने का बीड़ा शहर की समाजसेवी उर्वशी दत्त बाली ने उठाया है, जिन्होंने क्लब, किट्टी और सामाजिक समारोहों से दूरी बनाकर खुद को पूरी तरह इन बच्चों की सेवा और भविष्य निर्माण में झोंक दिया है।
कुकिंग क्लास में झलकी मजबूरी की सीख
हॉस्टल में मंगलवार को पापा बेकर्स की ओर से इन बच्चों के लिए विशेष कुकिंग क्लास का आयोजन किया गया। जब बच्चों से पूछा गया कि क्या उन्होंने पहले कभी खाना बनाया है तो कई मासूम आवाज़ों ने बताया कि मजबूरी में उन्हें अपने छोटे भाई-बहनों के लिए घर पर कई बार खाना बनाना पड़ा है। कुछ बच्चे पूर्ण रूप से अनाथ हैं, जबकि कुछ के माता-पिता मजदूरी और कामकाज में दिनभर व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण ये खुद ही खाना बनाना सीख गए। बच्चों ने साफ शब्दों में कहा— “हम यहां लड़ाई करने नहीं आए, अपना जीवन बनाने आए हैं।
”शहर बना परिवार, बढ़ते हाथ मदद के
इन 50 बच्चों में कई बिल्कुल अकेले हैं, लेकिन अब काशीपुर शहर उनके लिए साझा परिवार बनता जा रहा है। रोटरी क्लब ऑफ कार्बेट काशीपुर के प्रेसिडेंट डॉ. रवि सहोता और साहोटा पेपर फैक्टरी के अमन सहोता ने बच्चों के स्किल डेवलपमेंट के लिए एक लाख रुपये का सामान प्रदान किया और भरोसा दिलाया कि वे आगे भी लगातार बच्चों के साथ खड़े रहेंगे। ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह की धर्मपत्नी ममता सिंह अपनी चार फौजी बहनों के साथ हॉस्टल पहुंचीं और उन्होंने भी अपनी पूरी क्षमता से इन बच्चों की मदद जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
कपड़ों से कौशल तक, हर स्तर पर सहयोग
शहर के लोग अलग-अलग तरीकों से बच्चों की ज़रूरतें पूरी करने में जुटे हैं। किसी ने कपड़े दिए, किसी ने पढ़ाई का सामान, तो किसी ने ठंड से बचाने के लिए पर्दे और दरियां उपलब्ध कराईं। हर ओर से एक ही संदेश गूंज रहा है— “काशीपुर के ये 50 बच्चे अब अकेले नहीं हैं।” हॉस्टल की प्रिंसिपल ज्योति राणा और पूरा स्टाफ इन बच्चों के लिए सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक की भूमिका निभा रहे हैं और उन्हें सुरक्षा, स्नेह और अनुशासन का माहौल दे रहे हैं।
स्किल डेवलपमेंट की सशक्त पहल
इन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ रोज़ाना हॉस्टल पहुंचकर क्लासेस लगा रहे हैं। उर्वशी दत्त बाली स्वयं स्किल क्लासेस ले रही हैं, शांतनु चिकारा बच्चों को इंग्लिश स्पीकिंग सिखा रहे हैं, जबकि यूएसआर इंदू समिति के दिव्यांग बच्चे अपने कौशल के जरिए इन्हें नई स्किल्स सिखा रहे हैं। जगमोहन बंटी डांस की फ्री क्लास दे रहे हैं, पापा बेकर्स की ओर से कुकिंग क्लासेस, रजनी ठाकुर द्वारा स्टिचिंग क्लास, संजीवनी हॉस्पिटल की टीम द्वारा फर्स्ट एड प्रशिक्षण कराया जा रहा है और स्कूल के सभी शिक्षक शैक्षिक आधार मज़बूत करने में दिन-रात जुटे हैं।
“खाने पर नहीं, समय और स्किल पर लगाइए”
कार्यक्रम के अंत में उर्वशी दत्त बाली ने शहरवासियों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के खाने और औपचारिक शिक्षा की व्यवस्था सरकार द्वारा पहले से की जा रही है, इसलिए भोजन पर पैसा खर्च करने के बजाय इन्हें अतिरिक्त शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और कौशल सीखने के सामान की ज़रूरत है। काशीपुर में उर्वशी दत्त बाली की यह पहल लगातार बड़ा स्वरूप लेती दिख रही है और हर गुजरते दिन के साथ शहर के नए-नए लोग आगे आकर इन 50 बच्चों के भविष्य को संवारे जाने की इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं।
