समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली से कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव संभव: डॉ. अमित सहरावत
एम्स ऋषिकेश में कोलन कैंसर जागरूकता माह के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित
ऋषिकेश।
बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते भारत में कोलोरेक्टल कैंसर (बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर) के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। चिंताजनक बात यह है कि अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
एम्स ऋषिकेश के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से कोलन कैंसर जागरूकता माह के तहत ओपीडी परिसर में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों और उनके तीमारदारों को कैंसर के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

🔍 कोलन कैंसर के कारण और जोखिम
कैंसर चिकित्सा विभाग के सह आचार्य डॉ. अमित सहरावत ने बताया कि कोलोरेक्टल कैंसर भारत में छठे स्थान पर आने वाले कैंसरों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि फास्ट फूड, अधिक वसा युक्त आहार, रेड मीट, शराब और धूम्रपान इसके प्रमुख कारण हैं।
इसके अलावा मोटापा, तनाव, आनुवांशिक कारण और शारीरिक निष्क्रियता भी जोखिम को बढ़ाते हैं।
⚠️ पहचान और लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती चरण में लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन आगे चलकर ये संकेत दिखाई दे सकते हैं—
मल त्याग की आदतों में बदलाव (कब्ज या दस्त)
मल में खून आना
पेट में लगातार दर्द या सूजन
अचानक वजन घटना
कमजोरी और थकान
🏥 निदान और उपचार
कोलन कैंसर की पहचान के लिए कोलोनोस्कोपी, मल परीक्षण, सीटी स्कैन और रक्त जांच की जाती है।समय रहते निदान होने पर इसका सफल इलाज संभव है।
उपचार में शामिल हैं—
सर्जरी
कीमोथेरेपी
इम्यूनोथेरेपी
रेडिएशन थेरेपी
🛡️ बचाव के लिए जागरूकता जरूरी
डॉ. सहरावत ने बताया कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, फल-सब्जियों का अधिक सेवन और तंबाकू व शराब से दूरी बनाकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।
जिन लोगों के परिवार में पहले कैंसर के मामले रहे हैं, उन्हें नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
📊 भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले
एम्स ऋषिकेश के सह-आचार्य डॉ. दीपक सुंदरियाल के अनुसार, पहले भारत में यह कैंसर अपेक्षाकृत कम था, लेकिन शहरीकरण और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण अब इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार फास्ट फूड और सॉफ्ट ड्रिंक्स का अधिक सेवन युवाओं में मोटापा, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों को बढ़ा रहा है।
🗣️ ‘साइलेंट किलर’ है कोलोरेक्टल कैंसर
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह ने कहा कि यह कैंसर एक “साइलेंट किलर” की तरह है, क्योंकि शुरुआती लक्षण सामान्य होते हैं और लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
उन्होंने समय पर जांच और नियमित स्क्रीनिंग की अपील करते हुए कहा कि “अगर समय रहते जांच हो जाए तो इस बीमारी का सफल इलाज संभव है।”
📌 इंसेट: जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता
विशेषज्ञों ने बताया कि जागरूकता की कमी और भ्रांतियों के कारण मरीज समय पर जांच नहीं कराते, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।
उन्होंने कोलन कैंसर जागरूकता अभियान को पूरे वर्ष चलाने की आवश्यकता बताई।
✨ निष्कर्ष
कोलोरेक्टल कैंसर एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी है। समय पर स्क्रीनिंग, स्वस्थ जीवनशैली और जागरूकता इसके बचाव में अहम भूमिका निभाते हैं।
एम्स ऋषिकेश का यह प्रयास जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
📍 कार्यक्रम में मौजूद रहे:
अंकित तिवारी, दीपिका नेगी, अनुराग पाल, आरती राणा, विनीता सैनी, धानीराम पांडेय, डॉ. साईं, डॉ. हर्षा, डॉ. महेश, हिमानी धनाई, अनीता, अरविंद घिल्डियाल सहित अन्य।

