ऋषिकेश-हरिद्वार में पर्यटकों की लापरवाही बन रही मौत का कारण, मई 2026 में 15 से अधिक मौतें
गंगा में बढ़ता मौत का आंकड़ा: चेतावनियों को अनदेखा करना पड़ रहा भारी
ऋषिकेश/हरिद्वार
( उमाशंकर कुकरेती)
कहावत है कि आग, हवा और पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्व हैं, लेकिन यही तत्व जब अपना विकराल रूप दिखाते हैं तो इंसान के लिए मौत का कारण भी बन जाते हैं। उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन नगर ऋषिकेश और हरिद्वार में इन दिनों यही भयावह तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां गंगा नदी में बढ़ते हादसे प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन चुके हैं।
गर्मी की छुट्टियों, वीकेंड और चारधाम यात्रा के चलते इन दिनों गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। लाखों श्रद्धालु और पर्यटक गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन प्रशासन की लगातार चेतावनियों के बावजूद लोग सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। परिणामस्वरूप, मई 2026 में ही ऋषिकेश और हरिद्वार क्षेत्र में गंगा में डूबने से 15 से अधिक मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।
चेतावनियों के बावजूद नहीं संभल रहे लोग
गंगा घाटों पर स्थानीय पुलिस, जल पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहती हैं। लगातार लाउडस्पीकर से लोगों को गहरे पानी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की हिदायत दी जाती है। घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा जंजीरें भी लगाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग नियमों को तोड़कर प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार गंगा की सतह भले ही शांत दिखाई दे, लेकिन नीचे की धाराएं बेहद खतरनाक होती हैं। पहाड़ों से उतरने वाला तेज बहाव व्यक्ति को कुछ ही सेकंड में अपने साथ बहा ले जाता है। यही वजह है कि अच्छे तैराक भी कई बार गंगा की धाराओं के सामने बेबस हो जाते हैं।
ईद की पूर्व संध्या पर दर्दनाक हादसा
हाल ही में ईद की पूर्व संध्या पर दास हुंडई का एक समूह ऋषिकेश घूमने पहुंचा था। गंगा का ठंडा पानी देखकर समूह के सदस्य स्नान के लिए नदी में उतर गए। बताया जा रहा है कि चार लोग किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन समूह के दो सदस्य—ऋतु और उपाध्याय—सिंगटाली पुल के पास तेज धारा में बह गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों को तैरना नहीं आता था। मौके पर मौजूद लोगों ने मदद के लिए शोर मचाया, जिसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया। घंटों तक चले तलाशी अभियान के बावजूद देर रात तक दोनों का कोई सुराग नहीं लग पाया। आशंका जताई जा रही है कि दोनों की मौत हो चुकी है।
मई 2026 में सामने आए बड़े हादसे
सिंगटाली पुल हादसा (30 मई 2026)
मेरठ से आए छह दोस्तों का समूह लक्ष्मणझूला क्षेत्र में घूमने पहुंचा था। प्रतिबंधित क्षेत्र में स्नान करते समय दो पर्यटक तेज धारा में बह गए। एसडीआरएफ ने एक युवक का शव बरामद कर लिया, जबकि महिला पर्यटक की तलाश लंबे समय तक जारी रही।
सेल्फी के चक्कर में बहे दो युवक
23 मई को उत्तर प्रदेश के अमरोहा से आए दो दोस्त ऋषिकेश के डबल-ट्रिपल बीच क्षेत्र में पत्थरों पर खड़े होकर फोटो और रील बना रहे थे। इसी दौरान पैर फिसलने से दोनों गंगा की तेज लहरों में समा गए।
मालकुंठी पुल हादसा
दिल्ली से परिवार के साथ आया 18 वर्षीय किशोर स्नान के दौरान संतुलन बिगड़ने से तेज बहाव में बह गया।
बहादराबाद गंगनहर हादसा
हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र में गंगनहर में स्नान करते समय यूपी का एक 14 वर्षीय किशोर तेज धारा में बह गया।
सबसे खतरनाक ‘डेथ जोन’
प्रशासन ने ऋषिकेश और हरिद्वार के कई क्षेत्रों को अति संवेदनशील घोषित किया है, लेकिन पर्यटक चोरी-छिपे वहां पहुंच रहे हैं।
ऋषिकेश के खतरनाक क्षेत्र
- नीम बीच
- साईं घाट
- मस्तराम घाट
- शिवपुरी का यूसुफ बीच
- सिंगटाली पुल क्षेत्र
- कौड़ियाला क्षेत्र
हरिद्वार के संवेदनशील क्षेत्र
- कांगड़ा घाट
- बहादराबाद गंगनहर
- पिरान कलियर क्षेत्र
हादसों के पीछे मुख्य कारण
प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश
पर्यटक अक्सर उन घाटों पर चले जाते हैं जिन्हें प्रशासन पहले ही खतरनाक घोषित कर चुका होता है।
सोशल मीडिया और रील्स का क्रेज
युवा वीडियो और सेल्फी के लिए नदी के बीच पत्थरों तक पहुंच जाते हैं। कई हादसे इसी लापरवाही के कारण हुए हैं।
अचानक बदलता जलस्तर
पहाड़ों में बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी के कारण गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिसका अंदाजा पर्यटकों को नहीं लग पाता।
चेतावनियों की अनदेखी
घाटों पर लगे चेतावनी बोर्ड, जंजीरें और बैरिकेड्स को पार करना अब आम बात बन चुकी है।
प्रशासन और SDRF की कार्रवाई
लगातार बढ़ते हादसों के बाद प्रशासन और एसडीआरएफ ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।
- त्रिवेणी घाट, नीम बीच और संवेदनशील घाटों पर SDRF की स्थायी तैनाती
- मोटरबोट, लाइफ जैकेट और रेस्क्यू उपकरणों की उपलब्धता
- घाटों पर लगातार मुनादी और चेतावनी घोषणाएं
- प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने वालों पर कार्रवाई और चालान की तैयारी
- स्थानीय राफ्टिंग गाइडों और स्वयंसेवकों की मदद से रेस्क्यू अभियान
कई मामलों में स्थानीय राफ्टिंग गाइडों ने अपनी जान जोखिम में डालकर डूबते लोगों को बाहर निकाला और CPR देकर उनकी जान बचाई।
हरिद्वार में मानवता की मिसाल
हाल ही में हरियाणा-उत्तराखंड विवाद के बीच हरिद्वार में इंसानियत की मिसाल भी देखने को मिली। यहां स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गंगनहर में बह रही दिल्ली निवासी युवती को सुरक्षित बाहर निकाला। इस साहसिक कार्य की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
पर्यटकों के लिए जरूरी सुरक्षा गाइडलाइन
- केवल उन्हीं घाटों पर स्नान करें जहां सुरक्षा जंजीरें लगी हों।
- गहरे और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में बिल्कुल न जाएं।
- रील्स और सेल्फी के लिए नदी के बीच पत्थरों पर न चढ़ें।
- बच्चों को अकेला पानी में न जाने दें।
- प्रशासन और पुलिस की चेतावनियों को गंभीरता से लें।
- यदि तैरना नहीं आता तो मुख्य धारा से दूर रहें।
सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा
गंगा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति की अपार शक्ति का भी स्वरूप है। इसकी धाराओं को हल्के में लेना किसी भी व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन बार-बार लोगों से अपील कर रहा है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही किसी परिवार की पूरी जिंदगी तबाह कर सकती है।
यदि समय रहते लोग नहीं संभले, तो गंगा में बढ़ता मौत का यह आंकड़ा आने वाले दिनों में और भयावह रूप ले सकता है।
