DIPRUttarakhandदेहरादून

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड के विकास के 5 वर्ष: सुशासन, विकास और जनकल्याण का नया अध्याय

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने नेतृत्व के पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं। इन पांच वर्षों में राज्य सरकार ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के कल्याण और आधारभूत संरचना जैसे अनेक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “यह दशक उत्तराखंड का दशक है” के विजन को आधार बनाकर राज्य सरकार ने विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने “विकल्प रहित संकल्प”, “सेवा, सुशासन और समर्पण” को शासन का मूल मंत्र बताते हुए उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने की दिशा में कार्य किया है।
रोजगार और पारदर्शी भर्ती को मिली नई दिशा
धामी सरकार ने युवाओं के लिए रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू कर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया, जिससे युवाओं का सरकारी नौकरियों पर विश्वास बढ़ा।
सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गईं। अग्निवीरों को समूह-‘ग’ की वर्दीधारी सेवाओं में सीधी भर्ती पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया।
मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना का बजट 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.30 करोड़ रुपये किया गया। योजना के तहत 147 युवाओं को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 92 को विदेशों में रोजगार मिला।
उद्योग और निवेश में रिकॉर्ड उपलब्धियां
धामी सरकार ने राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते हुए, जबकि एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग होने का दावा किया गया।
उद्योगों के लिए 6,000 एकड़ से अधिक अतिरिक्त लैंड बैंक विकसित किया गया। प्रदेश में 96,400 से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जिनसे 4.70 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
राज्य में 1,750 से अधिक स्टार्टअप स्थापित हो चुके हैं और स्टार्टअप इकोसिस्टम रैंकिंग में उत्तराखंड को लीडर राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ है।
पर्यटन बना अर्थव्यवस्था की नई ताकत
उत्तराखंड की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में 10,509 होटल एवं अन्य स्टे तथा 6,000 से अधिक होमस्टे संचालित हो रहे हैं।
चारधाम यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए सड़क, रोपवे और हेलीकॉप्टर सेवाओं का विस्तार किया गया है।
शिक्षा में कई ऐतिहासिक पहल
उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना।
पीएम श्री योजना के तहत पहले चरण में 141 विद्यालय तथा दूसरे चरण में 84 विद्यालय चयनित किए गए। राज्य के 500 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
2025 तक राज्य में सरकारी एवं निजी डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़कर 139 तथा इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 52 हो गई है।
सरकार द्वारा कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ विस्तार
स्वास्थ्य क्षेत्र में धामी सरकार ने कई नई योजनाएं शुरू कीं।
किच्छा में एम्स सैटेलाइट सेंटर का निर्माण तेजी से चल रहा है, जहां 250 बेड, 10 ऑपरेशन थिएटर, 30 आईसीयू बेड सहित अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
अटल आयुष्मान योजना के तहत 61 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। अब तक 17 लाख से अधिक मरीजों को 3,400 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया गया।
राज्य में 207 प्रकार की पैथोलॉजी जांच निःशुल्क की जा रही हैं। प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान में पांच मेडिकल कॉलेज संचालित हैं जबकि दो का निर्माण जारी है।
कनेक्टिविटी में नई उड़ान
दिल्ली-देहरादून 210 किलोमीटर इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया गया, जिसमें एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर वन्यजीव कॉरिडोर शामिल है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना के सर्वे को मंजूरी मिल चुकी है।
राज्य का सड़क नेटवर्क बढ़कर 51,728 किलोमीटर तक पहुंच गया है।
देहरादून एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल विकसित किया गया तथा 13 नए हेलीपोर्टों का निर्माण जारी है।
सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की शुरुआत भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
महिला सशक्तिकरण को नई मजबूती
धामी सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया।
सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया।
मुख्यमंत्री स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के तहत 5 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
लखपति दीदी योजना के अंतर्गत 2.54 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं।
नंदा गौरा योजना के तहत बालिका जन्म पर 11 हजार रुपये तथा 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए 51 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।
युवाओं और खिलाड़ियों के लिए बड़े फैसले
नई खेल नीति के तहत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में समायोजित करने का निर्णय लिया गया।
खिलाड़ियों के दैनिक भोजन भत्ते को 250 रुपये से बढ़ाकर 480 रुपये प्रतिदिन किया गया।
मुख्यमंत्री उदयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के तहत 3,900 उभरते खिलाड़ियों को 1,500 रुपये प्रतिमाह की खेल छात्रवृत्ति दी जा रही है।
सुशासन के पांच वर्ष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच वर्षों के कार्यकाल में राज्य सरकार ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के विकास और आधारभूत संरचना पर विशेष फोकस रखा है। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
हालांकि, इन उपलब्धियों के साथ-साथ राज्य में बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और आधारभूत सुविधाओं जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं, जिन पर सरकार आगे भी कार्य करने की बात कहती रही है।
(नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित उपलब्धियां और आंकड़े राज्य सरकार द्वारा जारी दावों एवं उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं।)