चेतावनियों के बावजूद गंगा घाटों पर लापरवाही बन रही मौत का कारण
हरिद्वार-ऋषिकेश। उत्तराखंड की जीवनदायिनी गंगा जहां करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था का केंद्र है, वहीं हर वर्ष यह नदी लापरवाही और नियमों की अनदेखी के कारण कई लोगों के लिए काल भी साबित हो रही है। प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ द्वारा बार-बार चेतावनी जारी किए जाने के बावजूद दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटक प्रतिबंधित घाटों और गहरे जलक्षेत्रों में उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
गौरतलब है कि हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में गंगा का जल प्रवाह अत्यंत तीव्र है। नदी की गहराई और बहाव का सही अनुमान न लगा पाने के कारण हर वर्ष कई पर्यटक डूबने की घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। लगभग प्रतिदिन ऐसी घटनाएं समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आ रही हैं।
इसी कड़ी में शनिवार को टिहरी जनपद के शिवपुरी क्षेत्र स्थित प्रतिबंधित यूसुफ घाट पर एक और दर्दनाक घटना सामने आई। दिल्ली निवासी 25 वर्षीय राहुल चौहान अपने छह दोस्तों के साथ ऋषिकेश घूमने आए थे। जानकारी के अनुसार सभी युवक प्रतिबंधित क्षेत्र में गंगा स्नान करने पहुंच गए। इसी दौरान राहुल गहरे पानी में उतर गया और तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गया।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की डीप डाइविंग टीम एवं आपदा राहत दल तत्काल मौके पर पहुंचा और सर्च अभियान शुरू किया। समाचार लिखे जाने तक युवक की तलाश जारी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटक अक्सर रोमांच और सोशल मीडिया पर वीडियो या रील बनाने के उद्देश्य से चेतावनी बोर्डों की अनदेखी कर गहरे पानी में उतर जाते हैं। कई बार स्थानीय लोगों और पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद लोग प्रतिबंधित घाटों तक पहुंच जाते हैं, जिसका परिणाम दुखद होता है।
हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में प्रशासन द्वारा कई घाटों को खतरनाक घोषित किया गया है। इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं तथा समय-समय पर मुनादी और जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। इसके बावजूद पर्यटकों की लापरवाही पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों की नदियां मैदानी क्षेत्रों की नदियों से भिन्न होती हैं। इनमें अचानक गहराई बढ़ जाना, तेज धारा और तल में मौजूद चट्टानें दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनती हैं। ऐसे में बिना लाइफ जैकेट और स्थानीय जानकारी के नदी में उतरना जानलेवा साबित हो सकता है।
एसडीआरएफ उत्तराखंड ने सभी पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे गंगा नदी अथवा अन्य जलस्रोतों के किनारे लगाए गए चेतावनी बोर्डों एवं प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। प्रतिबंधित घाटों और गहरे जलक्षेत्रों से दूर रहें तथा अनावश्यक जोखिम न उठाएं।
उत्तराखंड पर्यटन की पहचान है, लेकिन पर्यटन का आनंद तभी सुरक्षित है जब नियमों का पालन किया जाए। एक छोटी सी लापरवाही परिवारों के लिए जीवनभर का दुख बन सकती है। इसलिए आवश्यक है कि पर्यटक स्वयं जागरूक बनें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित पर्यटन को बढ़ावा दें।
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