उत्तराखंड में पैरावेट कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ी मुश्किलें, 15 अगस्त के बाद आमरण अनशन की चेतावनी
न्यायोचित मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो पशुपालन निदेशालय में करेंगे भूख हड़ताल
देहरादून। उत्तराखंड में पैरावेट वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 1 अगस्त 2026 से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार शुरू किया हुआ है। एसोसिएशन का कहना है कि कार्य बहिष्कार को सात दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक शासन और विभाग की ओर से उनकी मांगों पर कोई संतोषजनक एवं ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

एसोसिएशन ने सरकार और पशुपालन विभाग के समक्ष कई मांगें रखी हैं। इनमें कृत्रिम गर्भाधान एवं टीकाकरण कार्य में लागू लोकेशन आधारित ऑनलाइन प्रणाली समाप्त करना, आधार सत्यापन व पशुगणना एवं डाटा एंट्री के लिए एंड्रॉयड मोबाइल उपलब्ध कराना तथा मासिक इंटरनेट/डेटा रिचार्ज की व्यवस्था करना शामिल है।

इसके अलावा एसोसिएशन ने बाहरी फर्जी पैरावेट्स के खिलाफ कार्रवाई, नए कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को समाप्त कर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने तथा पिछले तीन वर्षों से लंबित गर्भाधान परीक्षण (Pregnancy Diagnosis), Calving एवं अन्य लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान करने की मांग की है।
15 अगस्त तक फैसला नहीं तो आमरण अनशन

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 अगस्त 2026 तक उनकी न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक एवं ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 अगस्त के बाद पैरावेट वेलफेयर एसोसिएशन उत्तराखंड के सभी सदस्य पशुपालन निदेशालय, देहरादून के प्रांगण में भूख हड़ताल/आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होंगे।

एसोसिएशन ने कहा है कि आंदोलन को शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से जारी रखा जाएगा और इससे उत्पन्न परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन एवं विभाग की होगी।
अब देखना होगा कि 15 अगस्त से पहले सरकार और पशुपालन विभाग पैरावेट कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं, या प्रदेश में आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
