यूपीसीएल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा: स्मार्ट मीटर से लेकर सीमावर्ती चौकियों और कुंभ कॉरिडोर तक तेज हुए बिजली सुधार के काम
- आरडीएसएस के तहत 12 मंडलों में 60 फीसदी से अधिक काम पूरा, नवंबर तक शत-प्रतिशत लक्ष्य
- 669 पीवीटीजी परिवारों को विद्युत संयोजन, 169 जनजातीय लाभार्थियों का विद्युतीकरण पूरा
- रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने वाले 19 वाइब्रेंट गांवों को ग्रिड से जोड़ने का काम जारी
- 43 दूरस्थ सीमावर्ती चौकियों को ग्रिड से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा यूपीसीएल
- कुंभ-2027 की तैयारियां तेज, ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर में विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण का काम जारी
- देहरादून में एचटी-एलटी लाइनों के भूमिगतकरण का करीब 75 फीसदी काम पूरा
- स्मार्ट मीटरिंग में तेजी, उपभोक्ताओं को रियल टाइम बिजली खपत और आपूर्ति की जानकारी मिलेगी
- स्मार्ट मीटर से मीटर रीडिंग में मानवीय हस्तक्षेप खत्म, बिलिंग शिकायतों में कमी की उम्मीद
- एटीएंडसी लॉस घटकर 13.58 फीसदी, बिलिंग दक्षता 87.92 और कलेक्शन एफिशिएंसी 98.29 फीसदी
- यूपीसीएल का राजस्व 11,355 करोड़ रुपये पहुंचा, पिछले वित्तीय वर्ष से करीब 6 फीसदी अधिक
- वितरण उपयोगिता रैंकिंग में यूपीसीएल को विशेष श्रेणी के राज्यों में दूसरा स्थान
- पावर एक्सचेंज से सस्ती बिजली खरीदकर करीब 200 करोड़ रुपये की बचत
- प्रदेश के 321 उपसंस्थानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, आरटी-डीएएस प्रणाली लागू
- कार्मिकों के हित में पदोन्नति, नियमितीकरण और एसीपी मामलों के निस्तारण पर जोर
- ‘समान कार्य समान वेतन’ से करीब 1,905 कार्मिक लाभान्वित
- कर्मचारियों से जुड़े 450 चिकित्सा प्रतिपूर्ति मामलों के निस्तारण में तेजी
- दिसंबर से फरवरी के बीच बढ़ी बिजली मांग, 350 से 450 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत की जरूरत
- केंद्रीय पूल और पावर एक्सचेंज के जरिए सर्दियों में अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की तैयारी
देहरादून, 22 अगस्त 2026। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने प्रदेश में विद्युत व्यवस्था को आधुनिक, सुदृढ़ और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों एवं उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मानव संसाधन, विद्युत वितरण व्यवस्था, स्मार्ट मीटर, आईटी आधारित सेवाओं, सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्युतीकरण तथा प्रस्तावित कुंभ-2027 को लेकर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई।
आरडीएसएस योजना के तहत 12 मंडलों में 60 प्रतिशत से अधिक काम पूरा
केंद्र पोषित रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के अंतर्गत यूपीसीएल के सभी 12 मंडलों में लॉस रिडक्शन तथा प्रणाली सुदृढ़ीकरण के कार्य 60 प्रतिशत से अधिक पूरे किए जा चुके हैं। इन कार्यों को नवंबर 2026 तक शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना की स्वीकृत लागत 1,262.38 करोड़ रुपये है, जबकि वित्तीय प्रगति 656.60 करोड़ रुपये बताई गई है।
पीवीटीजी जनजातियों के लिए भी विद्युत पहुंच बढ़ाने का काम किया गया है। प्रदेश में बुक्सा तथा वनराजी जनजातियों के लिए चिन्हित 669 संयोजन निर्गत किए गए हैं और यूपीसीएल इस योजना के कार्य पूर्ण करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है।
इसी तरह ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के अंतर्गत 169 लाभार्थियों को विद्युत संयोजन निर्गत कर कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इस कार्य की स्वीकृत लागत 90 लाख रुपये है और वित्तीय प्रगति शत-प्रतिशत है।
रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने वाले गांवों में विद्युतीकरण
राज्य और केंद्र सरकार की रिवर्स-पलायन की अवधारणा को साकार करने के लिए यूपीसीएल द्वारा 19 वाइब्रेंट गांवों को ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकृत किया जा रहा है। इस कार्य की स्वीकृत लागत 12.89 करोड़ रुपये है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों को बेहतर विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आरडीएसएस योजना के अंतर्गत 43 दूरस्थ सीमावर्ती चौकियों को ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकृत किए जाने का कार्य भी गतिमान है। इसकी स्वीकृत लागत 327.51 करोड़ रुपये है, जबकि अब तक 45.19 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है।
कुंभ-2027 को लेकर गंगा कॉरिडोर में भूमिगत विद्युत लाइन का काम
प्रस्तावित कुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश के गंगा कॉरिडोर क्षेत्र में विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण तथा विद्युत प्रणाली को स्काडा आधारित बनाने का कार्य वर्तमान में चल रहा है। इस परियोजना की स्वीकृत लागत 547.83 करोड़ रुपये है।
देहरादून शहर में भी एडीबी वित्त पोषित परियोजना के तहत एचटी और एलटी लाइनों के भूमिगतकरण का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इससे शहर की विद्युत व्यवस्था अधिक सुरक्षित और निर्बाध होने के साथ-साथ देहरादून के सौंदर्यीकरण में भी मदद मिलेगी। परियोजना की स्वीकृत लागत 977.03 करोड़ रुपये है और वित्तीय प्रगति 444.92 करोड़ रुपये बताई गई है।
स्मार्ट मीटरिंग में तेजी, उपभोक्ताओं को मिलेंगे कई फायदे
यूपीसीएल द्वारा स्मार्ट मीटर स्थापना की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी, बिल संबंधी सुविधाएं और विद्युत आपूर्ति बाधित होने की सूचना जैसी सुविधाएं प्राप्त होंगी।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 6,86,563 उपभोक्ता मीटर, 16,097 ट्रांसफार्मर मीटर तथा 2,757 फीडर मीटर की प्रगति दर्ज की गई है। कुल 7,05,417 मीटर की प्रगति बताई गई है।
स्मार्ट मीटर के माध्यम से मीटर रीडिंग में मानवीय हस्तक्षेप समाप्त होने, रीडिंग ऑनलाइन सर्वर पर सीधे उपलब्ध होने, बिलिंग संबंधी शिकायतों में कमी, मोबाइल ऐप पर खपत की विस्तृत जानकारी, विद्युत फॉल्ट अथवा सप्लाई बाधित होने की तत्काल सूचना तथा बिजली बचत के अवसरों की पहचान जैसे लाभ उपभोक्ताओं को मिलेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि पुराने मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलने पर उपभोक्ता से कोई इंस्टॉलेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बिलिंग और राजस्व संग्रह में सुधार
यूपीसीएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एटीएंडसी हानियों को 13.58 प्रतिशत के स्तर तक कम करने का लक्ष्य प्राप्त किया है। बिलिंग एवं संग्रह दक्षता में भी सुधार दर्ज किया गया है। वर्तमान में Billing Efficiency 87.92 प्रतिशत और Collection Efficiency 98.29 प्रतिशत बताई गई।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में यूपीसीएल द्वारा 11,355 करोड़ रुपये का सर्वाधिक राजस्व प्राप्त किया गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत अधिक है।
भारत सरकार की Distribution Utility Ranking में भी यूपीसीएल को विशेष श्रेणी के राज्यों में राज्य सरकार की वितरण कंपनियों में द्वितीय स्थान प्राप्त होने की जानकारी दी गई।
बिजली खरीद में भी बचत
ग्रिड अनुशासन और बिजली मांग के बेहतर प्रबंधन के लिए उपसंस्थानों पर आधुनिक ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस सिस्टम (ADRS) लागू किया गया है। इससे मांग के अनुरूप विद्युत भार का स्वतः प्रबंधन, पीक डिमांड में कमी, ग्रिड स्थिरता और विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता में सुधार सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
यूपीसीएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऊर्जा एक्सचेंजों से औसतन 4.19 रुपये प्रति यूनिट की दर से विद्युत खरीद की, जबकि नियामक आयोग द्वारा अनुमोदित औसत विद्युत क्रय दर 4.93 रुपये प्रति यूनिट थी। बेहतर पावर परचेज प्रबंधन के माध्यम से एक्सचेंज से कम दरों पर बिजली खरीद कर लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत हासिल किए जाने का दावा किया गया है।
प्रदेशभर में 321 उपसंस्थानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए Real Time Data Acquisition System (RT-DAS) प्रणाली लागू की गई है। इससे विद्युत पैरामीटरों की ऑनलाइन निगरानी, फॉल्ट की त्वरित पहचान और ग्रिड संचालन की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
मानव संसाधन से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपीसीएल के मानव संसाधन से जुड़े कार्यों की भी जानकारी दी गई। विभिन्न संवर्गों में पात्र कार्मिकों की पदोन्नति की गई है। मुख्यालय संवर्ग में विभिन्न संवर्गों के 32 कार्मिकों की पदोन्नति का उल्लेख किया गया है।
जिन कार्मिकों के आवेदन जून 2026 तक प्राप्त हुए थे, उनके वांछित दस्तावेज पूर्ण कर प्रथम, द्वितीय और तृतीय एसीपी के मामलों को स्वीकृत करने तथा नियमितीकरण/स्थायीकरण के आदेश जारी करने की जानकारी दी गई।
‘समान कार्य समान वेतन’ के संबंध में शासन द्वारा स्वीकृत आदेशों को संचालन स्तर पर लागू किया गया है, जिससे प्रथम चरण में लगभग 1,905 कार्मिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए हैं।
कार्मिकों के लगभग 450 चिकित्सा प्रतिपूर्ति मामलों में कैशलेस प्रक्रिया के अलावा अन्य मामलों को भी न्यूनतम स्थिति में लाने का दावा किया गया है। सहायक लेखाकार के सीधे भर्ती के लिए 75 पदों हेतु विज्ञप्ति जारी की गई है।
पेंशन से जुड़े 27 मामलों का निस्तारण तथा ईपीएफओ कर्मचारियों की ग्रेच्युटी के 15 मामलों में से 14 का निस्तारण किए जाने की जानकारी भी दी गई।
कर्मचारियों के हित में लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर
यूपीसीएल ने भविष्य में कर्मचारियों की डीपीसी समय से कराने, चयन वर्ष के प्रारंभ में ही पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने तथा देय तिथि से पूर्व आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर एसीपी प्रदान करने का लक्ष्य रखा है।
स्थायीकरण और नियमितीकरण के मामलों को भी समयबद्ध तरीके से निस्तारित करने तथा एनओसी के मामलों में अधिकतम सात कार्य दिवस के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सहायक अभियंता, लेखाधिकारी, विधि अधिकारी, अवर अभियंता, ड्राफ्ट्समैन और सहायक भंडारी सहित विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिशील होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा निगम के संशोधित स्टाफ स्ट्रक्चर के लिए प्रस्ताव एनआरसीओ के माध्यम से निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया भी जारी है।
बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था
प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए यूपीसीएल ने दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 की अवधि के लिए अतिरिक्त विद्युत व्यवस्था की तैयारी की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस अवधि में 350 से 450 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत की आवश्यकता के सापेक्ष 150 से 180 मेगावाट एडवांस ऊर्जा की बैंकिंग अन्य राज्यों को की जा चुकी है, जिसकी वापसी बैंकिंग शीतकाल में प्राप्त होगी।
इसके अलावा केंद्रीय पूल से आवंटित ऊर्जा में से 200 मेगावाट अतिरिक्त ऊर्जा राज्य को आवंटित कराने की प्रक्रिया भी गतिमान है। इन प्रयासों के माध्यम से अतिरिक्त विद्युत उपलब्धता की कमी को पावर एक्सचेंजों के जरिए पूरा करने की योजना है।
उपभोक्ता सुविधाओं और तकनीकी आधुनिकीकरण पर फोकस
यूपीसीएल की ओर से प्रस्तुत उपलब्धियों में एक तरफ विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर भूमिगतकरण, स्मार्ट मीटरिंग, आरडीएसएस, आरटी-डीएएस और स्काडा जैसी तकनीकों पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को बेहतर बिलिंग, रियल टाइम खपत की जानकारी और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार यूपीसीएल का फोकस केवल विद्युत आपूर्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाइन लॉस कम करने, राजस्व बढ़ाने, बिजली खरीद में बचत करने, सीमावर्ती एवं जनजातीय क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने तथा आने वाले कुंभ-2027 के लिए विद्युत ढांचे को आधुनिक बनाने पर भी है।
