क्यों हो रहा हिमगिरी बस सेवा का स्वागत और विरोध? जानिए पूरा मामला
देहरादून। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए देहरादून से शुरू की जा रही जीएमओयू की हिमगिरी बस सेवाओं को लेकर परिवहन क्षेत्र में विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर जहां पहाड़ के यात्रियों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर रोडवेज कर्मचारी यूनियन, टीजीएमओसी, यातायात सहकारी संघ और टैक्सी संचालकों ने इसके संचालन पर आपत्ति जताई है।
विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि हिमगिरी बसों के संचालन में परमिट और रूट विस्तार से जुड़े नियमों का पालन किया जाना चाहिए। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि देहरादून से पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सीधी बस सेवा शुरू होने से आम यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
टीजीएमओसी और यातायात सहकारी संघ ने जताई आपत्ति
टीजीएमओसी और यातायात सहकारी संघ के पदाधिकारियों ने हिमगिरी सेवाओं के विस्तार का विरोध किया है। उनका कहना है कि संबंधित परमिट केवल पहले से संचालित सेवाओं के रूट एक्सटेंशन के लिए हैं, न कि बड़ी संख्या में नई बस सेवाएं शुरू करने के लिए।
पदाधिकारियों के मुताबिक जिन बसों का संचालन पहले ऋषिकेश या हरिद्वार से होता था, उन्हीं का नियमानुसार रूट विस्तार किया जा सकता है। यदि नियमों के विपरीत नई बसों का संचालन किया गया तो इसका सड़क पर विरोध किया जाएगा।
रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने भी उठाए सवाल
उत्तराखंड रोडवेज एम्प्लॉइज यूनियन के प्रदेश महामंत्री रविनंदन कुमार ने परिवहन मंत्री को पत्र भेजकर जीएमओयू की नई समय-सारणी और बस संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
यूनियन का कहना है कि उत्तराखंड परिवहन निगम पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहा है और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी लंबित है। ऐसे में व्यस्त और अधिक आय वाले मार्गों पर निजी बसों को संचालन की अनुमति देना निगम के हित में नहीं है।
यूनियन का आरोप है कि निजी संचालक मुख्य रूप से लाभ वाले मार्गों पर बसें चलाएंगे, जबकि घाटे वाले और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सेवा का भार रोडवेज पर ही रहेगा।
टैक्सी संचालकों को भी सवारी छिनने की चिंता
देहरादून-गढ़वाल ट्रैकर जीप कमांडर संचालन समिति के अध्यक्ष ध्रुव सिंह बिष्ट ने रिस्पना पुल क्षेत्र में हिमगिरी बसों के ठहराव पर आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि यदि बसें रिस्पना टैक्सी स्टैंड के सामने रुककर सवारियां बैठाती हैं, तो इसका सीधा असर स्थानीय टैक्सी चालकों की आजीविका पर पड़ेगा। समिति ने प्रशासन से मांग की है कि हिमगिरी बसों को रिस्पना पुल टैक्सी स्टैंड के पास खड़ा करने या वहां से सवारी बैठाने की अनुमति न दी जाए।
समिति ने चेतावनी दी है कि मांग नहीं मानी गई तो टैक्सी संचालक आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
दूसरी ओर हिमगिरी बस सेवा के समर्थन में आवाज
वहीं, नैनीडांडा विकास समिति ने देहरादून से पर्वतीय क्षेत्रों के लिए हिमगिरी बस सेवा शुरू करने की पहल का स्वागत किया है।
समिति का कहना है कि सीधी बस सेवा शुरू होने से पहाड़ जाने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। यात्रियों का समय और धन दोनों बचेंगे और उन्हें बार-बार वाहन बदलने की परेशानी से भी निजात मिल सकती है।
समिति के अध्यक्ष सतीश घिल्डियाल और सचिव अर्जुन पटवाल ने टीजीएमओ की ओर से इस सेवा के विरोध पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जनहित में शुरू की गई सीधी बस सेवा में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सेवा को रोकने या संचालन में बाधा डालने का प्रयास किया गया तो समिति उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक कार्यालय पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेगी।
आखिर विवाद की असली वजह क्या?
दरअसल, हिमगिरी बस सेवा को लेकर विवाद के केंद्र में परमिट, रूट विस्तार, बसों के संचालन और यात्रियों के लिए उपलब्ध परिवहन व्यवस्था है।
जहां परिवहन यूनियनें नियमों और रोडवेज की आर्थिक स्थिति का हवाला देकर विरोध कर रही हैं, वहीं पहाड़ के यात्रियों और समर्थक संगठनों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए देहरादून से सीधी बस सेवा उपलब्ध होना आम जनता के हित में है।
अब देखना होगा कि परिवहन विभाग इस पूरे विवाद पर क्या निर्णय लेता है और हिमगिरी बस सेवाओं के संचालन को लेकर परमिट एवं रूट संबंधी स्थिति किस तरह स्पष्ट की जाती है।
