देहरादून

सरकारी जमीन की 90 साल की लीज पर कांग्रेस हमलावर, धामी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

7,000 बीघा जमीन निजी निवेशकों को देने की प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल; जॉर्ज एवरेस्ट लीज और अस्पताल की जमीन निरस्त करने का मामला भी उठाया

देहरादून, 12 सितंबर 2026। प्रदेश कांग्रेस की चार्जशीट कमेटी ने धामी सरकार पर सरकारी जमीनों के इस्तेमाल और आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। शनिवार को देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से करीब 7,000 बीघा सरकारी जमीन को 90 वर्ष तक की लीज पर देने की प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि धामी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की बेशकीमती सरकारी जमीनों का इस्तेमाल निजी और कॉरपोरेट हितों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर चहेते लोगों को जमीन कौड़ियों के भाव देने का आरोप लगाया।
90 साल की लीज और सर्किल रेट पर कांग्रेस के सवाल
करन माहरा ने कहा कि यूआईआईडीबी के माध्यम से उद्यान विभाग, पोटैटो प्रोजेक्ट, ब्रीडिंग गार्डन समेत विभिन्न विभागों की करीब 7,000 बीघा खाली अथवा कम उपयोग वाली सरकारी भूमि को चिह्नित कर लैंड बैंक तैयार किया गया है।
कांग्रेस के अनुसार, इस भूमि को निजी निवेशकों को 90 वर्ष तक की दीर्घकालीन लीज पर देने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित परियोजनाओं में फाइव स्टार होटल, लग्जरी रिसॉर्ट, विला, कमर्शियल टाउनशिप, वेलनेस सेंटर और निजी स्कूल जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
माहरा ने दावा किया कि लीज पर ली गई जमीन को आगे सब-लीज करने और बैंक के पास बंधक रखकर ऋण लेने की अनुमति भी प्रस्तावित व्यवस्था में है। पात्रता के लिए कंपनी का पिछले तीन वर्षों का न्यूनतम वार्षिक टर्नओवर 500 करोड़ रुपये और नेटवर्थ 60 करोड़ रुपये होने जैसी शर्तों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
कांग्रेस का आरोप है कि निर्धारित राशि का केवल 25 प्रतिशत 30 दिन के भीतर जमा करना होगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत राशि अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से जमा करने की व्यवस्था है। पार्टी ने इन शर्तों को बड़े कॉरपोरेट समूहों के लिए अनुकूल बताया।
कृषि भूमि के सर्किल रेट से व्यावसायिक जमीन का मूल्यांकन क्यों?
माहरा ने जमीन के लीज रेंट के लिए कृषि भूमि के सर्किल रेट को आधार बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि जमीन का इस्तेमाल होटल, रिसॉर्ट और टाउनशिप जैसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होना है तो उसका मूल्यांकन कृषि भूमि के सर्किल रेट के आधार पर क्यों किया जा रहा है।
कांग्रेस का आरोप है कि कृषि और व्यावसायिक दरों के अंतर के कारण सरकारी खजाने को राजस्व का नुकसान हो सकता है और कंपनियों को जमीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकती है।
भू-कानून को लेकर भी सरकार को घेरा
माहरा ने कहा कि एक ओर प्रदेश में बाहरी लोगों और कंपनियों द्वारा जमीन खरीद पर नियंत्रण को लेकर सख्त भू-कानून की मांग होती रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों बीघा सरकारी जमीन को बड़े कॉरपोरेट समूहों को लंबी अवधि की लीज पर देने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में लीजहोल्ड जमीन को फ्रीहोल्ड में बदलने का रास्ता भी खुल सकता है। कांग्रेस ने कहा कि सरकारी जमीन पर पहला अधिकार स्थानीय युवाओं, ग्राम पंचायतों और सहकारी संस्थाओं का होना चाहिए।
माहरा ने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले बोर्ड से जुड़ा यह निर्णय करीब डेढ़ साल तक जनता के सामने क्यों नहीं आया।
जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार ने स्थानीय लोगों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की अनदेखी की है। उन्होंने यूआईआईडीबी के गठन और उसके जरिए सरकारी जमीनों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
आर्य ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला उठाते हुए कहा कि एशियाई विकास बैंक के ऋण से करोड़ों रुपये खर्च कर वहां पर्यटन से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित किया गया। इसके बाद करीब 142 एकड़ क्षेत्र और विकसित सुविधाओं को 15 वर्ष के लिए निजी कंपनी को लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक कंसेशन फीस पर दिए जाने का मामला सामने आया।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी सार्वजनिक संपत्ति और पहले से विकसित सरकारी सुविधाओं को निजी कंपनी को सौंपने से पहले उसके वास्तविक आर्थिक मूल्य, संभावित राजस्व और राज्यहित का पर्याप्त आकलन किया गया था या नहीं।
आर्य ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि टेंडर में शामिल तीन कंपनियों के बीच कारोबारी संबंध होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली का मामला भी उठा
आर्य ने जॉर्ज एवरेस्ट जाने वाली सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली के विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूली पर रोक लगाई गई।
कांग्रेस ने सवाल किया कि यदि सार्वजनिक सड़क पर शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं था तो ऐसी स्थिति पैदा कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई।
अस्पताल के लिए प्रस्तावित जमीन का आवंटन निरस्त करने पर सवाल
चार्जशीट कमेटी के सदस्य मनोज रावत ने भूमि प्रबंधन और प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता से जुड़े एक अन्य मामले को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग को विश्वास में लिए बिना बड़े अस्पताल के लिए प्रस्तावित भूमि का आवंटन निरस्त कर दिया गया।
रावत के अनुसार अस्पताल और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे के लिए करीब 23,137 वर्गमीटर यानी लगभग 5.7 एकड़ भूमि चिन्हित की गई थी। उनका आरोप है कि 13 दिसंबर 2024 के घटनाक्रम के बाद 25 फरवरी 2025 को स्वास्थ्य विभाग की पूर्व सूचना अथवा सहमति के बिना भूमि का आवंटन निरस्त कर दिया गया।
उन्होंने संबंधित कंपनियों की योग्यता और पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए। रावत ने दावा किया कि प्रक्रिया से जुड़ी कंपनियों के बीच कारोबारी संबंधों की भी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने नोएडा अथॉरिटी की ओर से सिक्का डेवलपर्स के खिलाफ 277 करोड़ रुपये की रिकवरी के आदेश और कंपनी की संपत्तियों से जुड़ी कार्रवाई का भी उल्लेख किया। साथ ही अन्य राज्यों में दर्ज मामलों और कथित नियम उल्लंघनों का हवाला देते हुए कंपनियों की पात्रता की जांच की मांग की।
टेंडर प्रक्रिया पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
रावत ने कहा कि प्रक्रिया में 18,001 वर्गमीटर और 50,036 वर्गमीटर के दो प्रमुख भूखंड शामिल थे। कांग्रेस का आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 का नेटवर्थ प्रमाणपत्र निर्धारित समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया, इसके बावजूद सिक्का डेवलपर्स तकनीकी अर्हता में असफल होने के बाद भी वित्तीय बोली के चरण तक पहुंची और उसे भूमि का अनंतिम आवंटन किया गया।
कांग्रेस ने इसे टेंडर नियमों और संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के अधिकार के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा, मनोज रावत, डॉ. प्रेम बहुखंडी, डॉ. प्रतिमा सिंह, प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी और अमरजीत सिंह मौजूद रहे।