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अभिनेता और फिल्म निर्माता मनोज कुमार का 87 साल की उम्र में निधन

 नई दिल्ली। अभिनेता और फिल्म निर्माता मनोज कुमार  का 87 साल की उम्र में निधन हो गया। लंबी बीमारी से जूझने के बाद 4 अप्रैल, 2025 को सुबह 3:30 बजे मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर कई बॉलीवुड सेलेब्स ने शोक जताया है।

लंबे समय से बीमार चल रहे थे एक्टर

अभिनेता के बेटे ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। एएनआई से बात करते हुए उनके बेटे कुणाल गोस्वामी ने कहा, “नमस्कार जी, मैं कुणाल गोस्वामी हूं। दुर्भाग्य से, मेरे पिता मनोज कुमार का आज सुबह करीब 3:30 बजे कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे, यह भगवान की कृपा है कि उन्हें आखिरी समय में ज्यादा परेशानी नहीं हुई, शांतिपूर्वक उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 

कल सुबह 11 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। आप सभी का धन्यवाद।”

मनोज कुमार के बेटे ने दी जानकारी

कुणाल ने यह भी कहा कि उनके पिता की सेहत कुछ समय से खराब चल रही थी। दो महीने में उनकी उम्र 88 साल हो जाती। उन्होंने कहा,”वे बहुत खुश थे, हालांकि अपनी उम्र के कारण थोड़े अस्वस्थ थे।” अंतिम संस्कार के बारे में जानकारी देते हुए कुणाल ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार कल यानी शनिवार, 5 अप्रैल, 2025 को होगा। अभिनेता के चचेरे भाई मनीष आर गोस्वामी ने भी दुख व्यक्त करते हुए कहा, “यह पूरे देश के लिए दुखद खबर है। देशभक्ति पर फिल्में बनाने का युग आज समाप्त हो गया। यह एक सच्चे भारतीय और सच्ची देशभक्ति के युग का अंत है।”
मनोज कुमार की अंतिम यात्रा कल सुबह 11 बजे उनके आवास से निकलेगी। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के विले पार्ले (पश्चिम) स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा।

एक्टिंग के अलावा निर्देशन में भी अपनाया हाथ

मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई, 1937 को एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में जन्मे हरिकृष्ण गोस्वामी के रूप में हुआ था। खासतौर पर 1960 और 1970 के दशक में उन्होंने खूब नाम कमाया। उन्हें उपकार,पूरब और पश्चिम और शहीद जैसी देशभक्ति फिल्मों में उनकी प्रतिष्ठित भूमिकाओं के लिए प्यार से “भारत कुमार” के नाम से भी जाना जाता था। अपने राष्ट्रवादी किरदार की वजह से वो घर-घर मशहूर हुए। उन्हें भारतीय गौरव के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

अभिनय के अलावा,उन्होंने एक निर्देशक और निर्माता के रूप में भी काम किया। उनकी निर्देशित पहली फिल्म उपकार (1967) को सेकेंड बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।

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