Healthदेहरादून

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

ललित जोशी बोले— मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सशक्त बनाना जरूरी

देहरादून, 10 अक्टूबर।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेलाकुई में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष का विषय था— “सेवाओं तक पहुंच: आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य।” कार्यक्रम में विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव जस्टिस सीमा डुंकराकोटी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य किसी व्यक्ति के समग्र विकास का आधार है, और इसे शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने आपदाओं व संकट की घड़ियों में मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के प्रति सहानुभूति और सहयोग के महत्व पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि, सीआईएमएस एवं यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के अध्यक्ष तथा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य, एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने कहा कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आज भी कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है। बच्चों और किशोरों को लचीलापन विकसित करने में मदद करने के लिए स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए।”

संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य महानिदेशालय, सुमित देव बर्मन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को जमीनी स्तर तक सशक्त बनाने की दिशा में सरकार कई योजनाएं लागू कर रही है, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता पहुंच सके।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाने के बजाय उन्हें खुले रूप से स्वीकार करना ही उपचार की पहली सीढ़ी है। उन्होंने समाज से मानसिक रोग से पीड़ित लोगों के प्रति सहानुभूति और सहयोग का वातावरण बनाने की अपील की।

कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. पवन शर्मा, एम.ओ. प्रदीप राणा, नर्सिंग स्टाफ, प्रशिक्षु एवं विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी की। विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया। नुक्कड़ नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि तनाव, अवसाद और चिंता जैसी स्थितियों में सही परामर्श और सहयोग व्यक्ति को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करता है।

कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के अधिकारियों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

Uma Shankar Kukreti