मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का विकास मॉडल पर लगेगी मुहर।
2027 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगाएंगे हैट्रिक..?
उत्तराखंड की सियासत में ये बड़ा सवाल
उत्तराखंड की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर जरूर है, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है
क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 2027 में जीत की हैट्रिक लगाएंगे क्या उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में कामयाब होगी और सबसे महत्वपूर्ण सवाल
आखिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक भविष्य क्या है आइए समझते हैं उत्तराखंड की राजनीति का पूरा समीकरण।
2027 में धामी के नेतृत्व पर भाजपा का भरोसा
उत्तराखंड में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिस पर मुख्यमंत्री धामी अब तक खरे उतरे है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने संकेत दिया कि पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लड़ेगी।
यानी साफ है फिलहाल भाजपा के राजनीतिक संदेश में धामी ही पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं।
भाजपा नेतृत्व लगातार धामी सरकार के विकास और गुड गवर्नेंस को चुनावी मुद्दा बनाने की बात कर रहा है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनने का भरोसा भी मुख्यमंत्री धामी पर जताया है।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में 2022 में भाजपा ने रचा था इतिहास अगर 2022 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा ने उत्तराखंड में 70 में से 47 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था।
इसके बाद पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की दूसरी पारी शुरू की।
खास बात यह है कि धामी खुद खटीमा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।
बाद में उन्होंने चंपावत विधानसभा उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की।
यही राजनीतिक घटनाक्रम धामी के नेतृत्व और भाजपा हाईकमान के भरोसे को समझने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
धामी मॉडल की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
धामी सरकार अपने कार्यकाल में कई बड़े फैसलों को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है।
इनमें समान नागरिक संहिता यानी UCC, चारधाम यात्रा का प्रबंधन, विकास परियोजनाएं, निवेश, रोजगार और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं।
भाजपा नेतृत्व भी इन मुद्दों को 2027 के चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बनाता दिखाई दे रहा है।
लेकिन राजनीति में सिर्फ उपलब्धियां ही काफी नहीं होतीं। चुनाव में जनता का मूड, स्थानीय मुद्दे, बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं, आपदा प्रबंधन तथा उम्मीदवारों की छवि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती
उत्तराखंड की राजनीति में एक बात हमेशा महत्वपूर्ण रही है।
यहां सत्ता में वापसी आसान नहीं मानी जाती थी।ऐसे में भाजपा अगर 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करती है तो यह उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री धामी के लिये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
लेकिन इसके लिए पार्टी को सिर्फ मुख्यमंत्री के चेहरे पर निर्भर रहने के बजाय 70 विधानसभा सीटों पर मजबूत संगठन और स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों की जरूरत होगी। जो की मुख्यमंत्री धामी अपनी भूमिका बखूबी निभा भी रहे है।
भाजपा ने टिकट वितरण को लेकर भी winnability यानी जीतने की क्षमता को महत्वपूर्ण मापदंड बताया है।
कांग्रेस के लिए भी 2027 बड़ी चुनौती
दूसरी तरफ कांग्रेस भाजपा को सत्ता से बाहर करने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस के सामने चुनौती होगी कि वह जनता के सामने एक मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट रणनीति और प्रभावी चुनावी नैरेटिव पेश करे।
क्योंकि 2027 का चुनाव सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं होगा।
यह चुनाव इस बात पर भी होगा कि उत्तराखंड की जनता अगले पांच साल के लिए किस नेतृत्व पर भरोसा करती है।
जनता कह रही है धामी लगाएंगे मुख्यमंत्री पद की हैट्रिक।
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर
क्या पुष्कर सिंह धामी 2027 में मुख्यमंत्री पद की हैट्रिक लगाएंगे
राजनीतिक परिस्थितियों को देखें तो फिलहाल धामी मजबूत स्थिति में दिखाई देते हैं।
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उनके नेतृत्व में 2027 का चुनाव लड़ने के संकेत दे चुका है।
पार्टी लगातार उनकी सरकार के कामकाज और विकास मॉडल को लेकर सकारात्मक संदेश दे रही है।
लेकिन चुनाव का फैसला अभी नहीं हुआ है।
2027 की लड़ाई में बहुत कुछ आने वाले महीनों में तय होगा।
जनता का रुझान क्या रहता है विपक्ष की रणनीति क्या होती है
भाजपा अपने मौजूदा विधायकों और उम्मीदवारों में कितना बदलाव करती है
और सबसे महत्वपूर्ण
क्या धामी सरकार अपने काम को जनता के बीच वोट में बदल पाती है।
यही सवाल 2027 के चुनाव की दिशा तय करेंगे।
धामी का राजनीतिक भविष्य
जहां तक पुष्कर सिंह धामी के राजनीतिक भविष्य की बात है, फिलहाल उनके पास उनके द्वारा राज्य में किये गये कार्य और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता के साथ भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा दिखाई देता है।
अगर भाजपा 2027 में दोबारा सरकार बनाने में सफल होती है और धामी के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत जनादेश मिलता है, तो उनका कद उत्तराखंड से बाहर भी और मजबूत हो सकता है।
लेकिन अगर चुनावी समीकरण उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे, तो भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर नए राजनीतिक समीकरण भी सामने आ सकते हैं।
इसलिए 2027 के चुनाव मुख्यमंत्री धामी के राजनीतिक भविष्य का सबसे बड़ा फैसला तय करेगा।
2027 के चुनाव में जनता का जनादेश यह तस्वीर साफ करेगी।
वंही भाजपा 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
और पार्टी के मौजूदा संकेतों के मुताबिक पुष्कर सिंह धामी ही उत्तराखंड के प्रमुख चेहरे हैं।
लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में अंतिम फैसला न दिल्ली में होगा, न देहरादून में अंतिम फैसला होगा उत्तराखंड की जनता की अदालत में।
भाजपा कार्यकर्ताओं में मुख्यमंत्री धामी जिस प्रकार से ऊर्जा भर रहे है उससे यह कहा जा सकता है कि धामी हैट्रिक लगाएंगे।
भाजपा बनाएगी लगातार तीसरी सरकार या 2027 में उत्तराखंड की राजनीति कोई नया मोड़ लेगी इसका जवाब आने वाला विधानसभा चुनाव देगा।
