संविधान ही लोकतंत्र की आत्मा, जनता सर्वोच्च शक्ति : विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण
देहरादून।
“भारत माता का मंदिर यह,
समता का संवाद जहाँ,
सबका शिव-कल्याण यहाँ है,
पाएँ सभी प्रसाद यहाँ।”

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की इन कालजयी पंक्तियों का स्मरण करते हुए ऋतु खण्डूडी भूषण ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों सहित समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दीं।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज ही के दिन, वर्ष 1950 में, भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया था। संविधान की उद्देशिका में उल्लिखित—
“हम भारत के लोग इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं”—
यह पंक्ति इस तथ्य को रेखांकित करती है कि भारत के नागरिकों ने स्वयं अपना संविधान बनाया और स्वयं ही अपने भविष्य का निर्धारण करने की शक्ति प्राप्त की। यही ‘गण’ अर्थात जनता की सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है।

अपने उद्बोधन में श्रीमती खण्डूडी ने कहा कि हमारा संविधान केवल अनुच्छेदों और अनुसूचियों का कागजी संकलन नहीं, बल्कि एक जीवंत, सर्वसमावेशी और सर्वहितकारी मार्गदर्शक है, जिसकी संरक्षण छाया में भारत निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि बाबा साहेब की दूरदृष्टि और अद्भुत प्रतिभा के कारण ही आज समाज का प्रत्येक वर्ग सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सका है।

इस पावन राष्ट्रीय पर्व पर विधानसभा अध्यक्ष ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले समस्त अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन वीर सेनानियों का बलिदान अतुलनीय है और राष्ट्र सदैव उनका ऋणी रहेगा।
साथ ही, उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समस्त शहीदों को भी नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग और संघर्ष के कारण ही पृथक उत्तराखंड राज्य का स्वप्न साकार हो सका।
इस अवसर पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, सचिव विधायी धनंजय चतुर्वेदी, प्रभारी सचिव विधानसभा हेम पंत, विशेष कार्याधिकारी अशोक शाह सहित विनोद रावत, विशाल शर्मा, हरीश रावत, लक्ष्मी उनियाल, मयंक सिंघल, चन्द्रेश गौड़ एवं विधानसभा के अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
