उद्यान विभाग के जड़ी बूटी प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. कुकरेती बने विशेषज्ञ प्रशिक्षक
भेषज विकास इकाई ने विशेषज्ञ के रूप में किया था आमंत्रित, प्रशिक्षण शिविर में किसानों को दी औषधीय पौधों की उपयोगिता की जानकारी
यमकेश्वर/पौड़ी गढ़वाल। ग्राम ताछला, विकासखंड यमकेश्वर में भेषज विकास इकाई (उद्यान विभाग), कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल के तत्वावधान में एक दिवसीय जड़ी-बूटी कृषिकरण प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में क्षेत्रीय कृषकों को जड़ी-बूटी की नवीनतम कृषि तकनीक, पौधों के रखरखाव, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन तथा उनके औषधीय उपयोग की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. आर.आर. कुकरेती को भेषज विकास इकाई, उद्यान विभाग द्वारा प्रशिक्षक एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया था। डॉ. कुकरेती पिछले करीब 40 वर्षों से क्षेत्र में आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में लोगों की सेवा कर रहे हैं। आयुर्वेद एवं औषधीय वनस्पतियों के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए विभाग ने उन्हें कृषकों को प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किया।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. कुकरेती ने किसानों को विभिन्न औषधीय पौधों की पहचान, उनके वैज्ञानिक तरीके से कृषिकरण, पौधों के रखरखाव, उचित समय पर कटाई, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन और औषधीय उपयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियां औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के लिए बेहद अनुकूल हैं। वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान जड़ी-बूटी कृषिकरण को अपनी आय का बेहतर माध्यम बना सकते हैं।
शिविर में भेषज विकास इकाई (उद्यान विभाग), कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल के विभागीय अधिकारी एवं प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। विभागीय प्रतिनिधियों ने कृषकों को जड़ी-बूटी कृषिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार एवं विभाग की ओर से संचालित योजनाओं तथा तकनीकी सहयोग के संबंध में जानकारी दी।
इस दौरान कृषकों ने जड़ी-बूटी की खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से सवाल किए, जिनका मौके पर ही समाधान किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना और स्थानीय कृषकों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषिकरण तकनीकों से जोड़ना रहा।
डॉ. आर.आर. कुकरेती को विभाग द्वारा विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाना उनके चार दशक लंबे आयुर्वेदिक अनुभव और क्षेत्र में दी जा रही सेवाओं की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।
