देहरादून

राज्यसभा में डॉ. नरेश बंसल का वक्तव्य : संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण हेतु उच्च कदम की मांग

 

भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने शून्यकाल में भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा तथा संस्कृत भाषा के संरक्षण व व्यापक प्रसार का महत्वपूर्ण मुद्दा सदन में उठाया।

डॉ. बंसल ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला है और इसी के आधार पर मानव सभ्यताओं का विकास संभव हुआ। विश्व की अधिकांश भाषाओं की जड़ें भी किसी न किसी रूप में संस्कृत से जुड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति, वेद, पुराण, उपनिषद और वैदिक ज्ञान सभी संस्कृत में ही रचे गए हैं, जिनमें मानव जीवन का ब्रह्मांडीय व वैज्ञानिक ज्ञान निहित है। योग, गणित, व्याकरण, कालगणना, पर्यावरण आदि क्षेत्रों का मूल ज्ञान संस्कृत में उपलब्ध है।

डॉ. बंसल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्व में संस्कृत पर शोध हो रहे हैं, लेकिन भारतीय अपने ही दुर्लभ ज्ञान से दूर होते जा रहे हैं, जबकि यह ज्ञान बचपन से कंठस्थ होना चाहिए। वैज्ञानिक, सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक उत्थान में भारतीय ज्ञान परंपरा का अमूल्य योगदान है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को गंभीरता से देखा जा रहा है। नासा ने भी संस्कृत को वैज्ञानिक और कंप्यूटर-अनुकूल भाषा माना है, साथ ही आइंस्टीन, मैक्समूलर, निकोला टेस्ला और जोहान्स केप्लर जैसे विज्ञानियों ने भी संस्कृत को वैज्ञानिक भाषा के रूप में स्वीकार किया।

डॉ. बंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश उपनिवेशवादी मानसिकता से बाहर निकल रहा है और अपनी प्राचीन संस्कृति पर गर्व करते हुए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक, व्यवहारिक और नवीन रूप में जन-जन तक पहुँचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए, तथा संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन के लिए उच्चस्तरीय प्रयास किए जाएं।

उन्होंने कहा कि संस्कृत को कठिन भाषा समझना गलत धारणा है। इसके संरक्षण, पांडुलिपियों के संकलन, सरलीकरण और वैश्विक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता है।

“विश्वगुरु बनने के लिए संस्कृत में निहित ज्ञान को अपनाना जरूरी है”, उन्होंने जोर देकर कहा।

Uma Shankar Kukreti