देहरादून

जयकारों से गूंजी द्रोणनगरी, 94 फीट ऊंचे पवित्र ध्वज के आरोहण के साथ ऐतिहासिक झंडा मेला शुरू

देहरादून, 08 मार्च 2026।
राजधानी देहरादून में आस्था, परंपरा और गुरु भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब श्री गुरु राम राय जी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर ऐतिहासिक श्री झंडा साहिब का भव्य आरोहण किया गया। जैसे ही दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज परिसर में “झण्डा चढ़या चढ़या ए देहरादून, संगतां मनाले खुशियां…” के श्रद्धामयी स्वर गूंजे, पूरी द्रोणनगरी गुरु भक्ति और जयकारों से गूंज उठी।

रविवार को लाखों श्रद्धालुओं और देश-विदेश से आई संगतों की मौजूदगी में श्री दरबार साहिब में 94 फीट ऊंचे पवित्र झंडे जी का आरोहण किया गया और इसी के साथ ऐतिहासिक श्री झंडा जी मेला का विधिवत शुभारंभ हो गया।

आस्था का महासागर उमड़ा

रविवार सुबह से ही श्री दरबार साहिब परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आई संगतों ने श्री झंडे जी के दर्शन कर मत्था टेका और गुरु महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही और वातावरण गुरु महाराज के जयकारों से गूंजता रहा।

पूजा-अर्चना और पवित्र स्नान

सुबह लगभग 7 बजे विशेष पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। इसके बाद पवित्र ध्वजदंड को उतारकर विधि-विधान से दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और पंचगव्य से स्नान कराया गया। इसके पश्चात सादे और शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। परंपरा के अनुसार पूरी प्रक्रिया के दौरान झंडे जी को एक क्षण के लिए भी जमीन पर नहीं रखा जाता, बल्कि संगतें अपने हाथों पर उसे थामे रहती हैं।

दर्शनी गिलाफ चढ़ते ही उमड़ी श्रद्धा

दोपहर करीब 1:30 बजे जब दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो हजारों श्रद्धालु उसे स्पर्श कर पुण्य अर्जित करने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। इस बार देहरादून के व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।


शाम 4:12 बजे हुआ झंडे जी का भव्य आरोहण

सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज के निर्देशन में शाम ठीक 4 बजकर 12 मिनट पर 94 फीट ऊंचे पवित्र झंडे जी का आरोहण पूर्ण हुआ। जैसे ही ध्वज अपने पूर्ण आकार में लहराया, संगतों ने “जय श्री गुरु राम राय जी महाराज” और “जय श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज” के गगनभेदी जयकारे लगाए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से भर गया।

बाज के दर्शन को माना गया दिव्य संकेत

झंडे जी के आरोहण के बाद एक बाज ने ध्वज की परिक्रमा की। श्रद्धालु इसे हर वर्ष की तरह श्री गुरु राम राय जी महाराज की सूक्ष्म दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। इस दृश्य ने संगतों की श्रद्धा को और गहरा कर दिया।

एलईडी स्क्रीन और सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण

इस वर्ष मेले को और भव्य बनाने के लिए दरबार साहिब परिसर में पांच बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गईं। साथ ही फेसबुक और यूट्यूब के माध्यम से झंडे जी के आरोहण का लाइव प्रसारण किया गया। ड्रोन कैमरों से की गई कवरेज श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।


350 वर्ष पुरानी परंपरा

करीब 350 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा वाला यह झंडा मेला देहरादून की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सिखों के सातवें गुरु गुरु हर राय जी के बड़े पुत्र श्री गुरु राम राय जी महाराज का जन्म 1646 ईस्वी में पंजाब के होशियारपुर जिले के कीरतपुर में हुआ था। बाद में उन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया और यहां लोककल्याण के संदेश के साथ विशाल ध्वजदंड स्थापित किया।
परंपरा के अनुसार हर वर्ष होली के पांचवें दिन यानी पंचमी तिथि को गुरु राम राय जी महाराज का जन्मोत्सव मनाया जाता है और इसी अवसर पर ऐतिहासिक झंडा मेला आयोजित किया जाता है।

27 मार्च तक चलेगा मेला

मेला आयोजन समिति के अनुसार इस वर्ष झंडा मेला 27 मार्च (रामनवमी) तक चलेगा। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भंडारा, नगर परिक्रमा और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 10 मार्च को सुबह 7:30 बजे दरबार साहिब से नगर परिक्रमा भी निकाली जाएगी।

श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज का संदेश

झंडे जी के आरोहण के बाद श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने देश और प्रदेशवासियों को झंडा जी महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मेला प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और अमन-चैन का संदेश देता है। उन्होंने प्रार्थना की कि श्री गुरु राम राय जी महाराज की कृपा देश और प्रदेश के सभी लोगों पर सदैव बनी रहे।

प्रशासन और संगतों का सहयोग

मेला आयोजन समिति ने सफल आयोजन के लिए पुलिस, प्रशासन, मीडिया और दूनवासियों का आभार जताया। समिति के मेला अधिकारी विजय गुलाटी ने सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया।
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Uma Shankar Kukreti