मजदूर नेताओं पर गुंडा एक्ट और जिला बदर की कार्रवाई के विरोध में इंकलाबी मजदूर केंद्र ने उठाई आवाज
देहरादून, उत्तरांचल प्रेस क्लब में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा हरिद्वार में मजदूर नेताओं पर गुंडा एक्ट लगाकर जिला बदर की कार्यवाही को रद्द करने के लिए
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गयी।
हरिद्वार के जिला प्रशासन द्वारा इंकलाबी मजदूर केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी उर्फ पंकज कुमार व केंद्रीय परिषद सदस्य जय प्रकाश एवं पीपल्स यूथ फ्रंट के इंजीनियर ललित को गुंडा एक्ट के तहत 4 माह के लिए जिला बदर कर दिया गया है। इन मजदूर नेताओं का गुनाह यह है कि ये गैरकानूनी ठेका प्रथा के खिलाफ आवाज उठाते हैं और स्थायी काम पर लगे सभी ठेका और अस्थायी मजदूरों को स्थायी करने की मांग करते हैं। इन मजदूर नेताओं का अपराध यह भी है कि ये मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढाकर 30 हजार रु. महीना, ओवरटाइम का कानूनन दुगुना भुगतान एवं 8 घंटे कार्यदिवस की मांग भी करते हैं। और न सिर्फ मांग करते हैं बल्कि इसके लिये सड़क पर उतरकर संघर्ष और आंदोलन भी करते हैं। ऐसे में ये मजदूर नेता सिडकुल के कम्पनी मालिकों की आंखों में चुभ रहे हैं, और पूंजीपतियों की एसोसिएशन के इशारे पर जिला प्रशासन ने कानून का मखौल बनाते हुये वीना जांच पड़ताल के इन्हें जिला बदर कर दिया है।
हम सभी इससे परिचित ही हैं कि इस साल की पहली छमाही में देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों और शहरों में मजदूरों की जबरदस्त हड़तालें हुई थीं। एक के बाद एक लगातार तमाम फैक्टरियों के मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी की मांग की थी। यह भयंकर शोषण के विरुद्ध मजदूरों का एक वर्ग के रूप में प्रतिरोध था, जो कि कुछ जगहों (जैसे-सूरत) पर अभी भी जारी है। मजदूरों के इस वर्गीय उभार के दबाव में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, तेलंगाना और कर्नाटक इत्यादि राज्य सरकारों को मजदूरों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी करनी पड़ी थी।
अलग उत्तराखंड राज्य बने 25 साल हो चुके हैं और यहां अभी तक इंजीनियरिंग उद्योगों के लिये वेज बोर्ड का गठन तक नहीं हुआ था। लेकिन, मजदूरों की इन आक्रामक हड़तालों के दबाव में धामी सरकार को न्यूनतम वेतन में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ इंजीनियरिंग उद्योगों के लिये वेज बोर्ड का गठन भी करना पड़ा। हालांकि, उत्तराखंड सहित पूरे ही देश में मजदूरों का न्यूनतम वेतन आज भी इतना कम है कि इसे “भुखमरी वेतन” ही कहा जा सकता है। आज की भयंकर महंगाई में मजदूरों का न्यूनतम वेतन कम से कम 30 हजार रु. महीना होना चाहिये। साथ ही, ओवरटाइम के दुगुने भुगतान के कानून का सख्ती से पालन होना चाहिये।
इसी तरह उत्तराखंड के सिडकुल हरिद्वार एवं देहरादून के सेलाकुई में भी मजदूर आंदोलन के दौरान मजदूरों का पुलिसिया दमन किया गया। हरिद्वार में अनेकों मजदूरों के साथ इंकलाबी मजदूर केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी व केंद्रीय परिषद सदस्य जय प्रकाश एवं पीपुल्स यूथ फ्रंट के इंजीनियर ललित कुमार पर भी फर्जी मुकदमे कायम कर दिये गये। कैंपस और हैमिल्टन के मजदूरों के आंदोलन में पंकज बवाड़ी समझौता वार्ता में शामिल थे और दोनों कंपनियों के समझौता पत्र पर प्रशासन और श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ उनके भी हस्ताक्षर हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा पंकज बवाड़ी और जय प्रकाश पर गुंडा एक्ट के तहत कार्यवाही शुरू कर दी गई। दरअसल, मजदूरों की इन हड़तालों और प्रदर्शनों से सिडकुल के पूंजीपतियों के हाथ-पांव फूल गये थे और उनके इशारे पर ही मजदूर नेताओं पर यह हमला बोला गया।
इसके बाद अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई का एक नाटक कर बिना किसी जांच के आदेश पारित कर तीनों मजदूर नेताओं को जिला बदर कर दिया गया।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि पंकज बवाड़ी और जय प्रकाश अंकिता भंडारी हत्याकांड पर भी मोदी-धामी सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा कर रहे थे। इसके अतिरिक्त भाजपा सरकार सरकार द्वारा उत्तराखंड सहित पूरे देश में एस आई आर के तहत 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं इस नागरिकता के अधिकार पर हमले के खिलाफ भी आंदोलनो में इन साथियों की भागीदारी से भाजपा सरकार इन्हें निशाना बना रही थी। दीवाली से पूर्व बोनस पर मजदूर सड़कों पर फिर से आयेंगे और नोएडा मानेसर की तरह फिर से आंदोलन न हो इस भय के कारण इन मजदूर नेताओं को जिला बदर किया गया है। और तब तक
उत्तराखंड में जनवरी -फ़रवरी तक चुनाव भी हो जाएंगे। यही मुख्य वजह बनती है
मोदी सरकार द्वारा 3 नये आपराधिक कानूनों को पारित कर पुलिस राज की ओर कदम बढ़ा दिये गये हैं। मजदूर विरोधी 4 नये लेबर कोड पारित कर मजदूरों के ट्रेड यूनियन अधिकारों पर भारी हमला बोला जा चुका है। और अब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिये लोगों से मताधिकार और उनकी नागरिकता छीनने की साजिश की जा रही है। लेकिन अब जनता इनके खतरनाक मंसूबों को समझ रही है।
हरिद्वार में कानून का मखौल बनाते हुये मजदूर नेताओं को गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर किया जाना इसी तानाशाही को दिखाता है। इसका मकसद मजदूर आंदोलन के अपराधीकरण के साथ मजदूरों को उनके नेतृत्व से वंचित करना है जिसका पुरजोर विरोध बेहद जरूरी है।
यदि उत्तराखंड सरकार ने ये मजदूर नेताओं पर लगे फर्जी गुंडा एक्ट खत्म नहीं किए तो व्यापक आंदोलन की कड़ी में 22 नवंबर को हरिद्वार में विशाल मजदूर महापंचायत का आयोजन होगा, जिसमें देश के अलग -अलग प्रदेशों के ट्रेड यूनियन से जुड़े मजदूर नेता, किसान नेता एवम् सामाजिक संगठनों के सदस्य उपस्थित होंगे ।
प्रेस वार्ता में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाडी उर्फ पंकज कुमार, केंद्रीय परिषद सदस्य जय प्रकाश, उत्तराखंड महिला मंच की अध्यक्ष कमला पंत जी,सामांजिक कार्यकर्ता जगदीश कुकरेती जी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की महासचिव नीता, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के महासचिव भूपाल, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन(BHEL) के महामंत्री अवधेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

