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पौड़ी जिले में बाघ के आतंक पर लगाम लगाए वन विभाग : बचन बिष्ट

भाजपा नेता बचन बिष्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष पौड़ी को सौंपा पत्र, पंचायत सदस्यों ने भी उठाई ठोस कार्रवाई की मांग

जिला पंचायत के सदन में गूंजा मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा, अध्यक्ष रचना बुटोला ने वन विभाग को दिए शीघ्र समाधान के निर्देश

यमकेश्वर में बाघ-गुलदार का आतंक, ग्रामीणों का जीना हुआ मुश्किल

पौड़ी गढ़वाल। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बाघ और गुलदार की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार मानव और पशुओं पर हमलों की घटनाओं के बीच कई इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को अब जिला पंचायत के सदन में भी प्रमुखता से उठाया गया।
सदन में जिला पंचायत सदस्यों ने बाघ और गुलदार के बढ़ते आतंक का मुद्दा उठाते हुए वन विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की। सदस्यों का कहना था कि जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में वन्यजीवों की सक्रियता के कारण ग्रामीण भय के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। मानव जीवन के साथ ही पशुधन पर भी लगातार खतरा बना हुआ है।


मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष रचना बुटोला ने वन विभाग के अधिकारियों को समस्या का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा, ताकि ग्रामीणों को बाघ और गुलदार की दहशत से राहत मिल सके।
घायलों को मुआवजा देने में देरी नहीं
वन्यजीवों के हमले में घायल लोगों को राहत देने के मामले में भी जिला पंचायत अध्यक्ष ने गंभीर रुख अपनाया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वन्यजीव हमलों में घायल लोगों को अविलंब नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।
वहीं, अमरोली क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य बचन सिंह बिष्ट समेत विभिन्न क्षेत्रों के जिला पंचायत सदस्यों ने भी वन विभाग को पत्र भेजकर बाघ और गुलदार के लगातार हमलों पर चिंता जताई है। सदस्यों ने मांग की है कि मानव-पशु संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग केवल घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से प्रभावी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे।
पौड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही वन्यजीवों की सक्रियता अब महज वन विभाग की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण सुरक्षा का बड़ा सवाल बन चुकी है। जिला पंचायत के सदन में मुद्दा उठने के बाद अब निगाहें वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।