Uttarakhandचमोलीदेहरादून

नंदाकिनी के तेज बहाव में बह गई 19 वर्षीय सुमित्रा, एक सप्ताह बाद नदी किनारे मिला शव

चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सुतोल गांव की 19 वर्षीय युवती सुमित्रा, जो 15 अगस्त की शाम कपड़े धोने के लिए नंदाकिनी नदी के किनारे गई थी, वापस घर नहीं लौटी। करीब एक सप्ताह तक चले तलाश अभियान के बाद शनिवार को बरा गांव के नीचे नदी किनारे उसका शव बरामद हुआ।
कपड़े धोने गई थी सुमित्रा, फिर नहीं लौटी
जानकारी के अनुसार सुमित्रा 15 अगस्त की शाम घर से कपड़े धोने के लिए नंदाकिनी नदी की ओर गई थी। काफी समय बीतने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। नदी किनारे उसकी चप्पल मिलने के बाद परिजनों को उसके नदी के तेज बहाव में बह जाने की आशंका हुई। इसके बाद प्रशासन और बचाव दल को सूचना दी गई।
एक सप्ताह तक चला खोज अभियान
सुमित्रा की तलाश में प्रशासन और बचाव दलों ने लगातार नदी और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान चलाया। बरसात के कारण नंदाकिनी नदी का जलस्तर और बहाव काफी तेज होने से राहत एवं बचाव कार्य में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
कई दिनों की तलाश के बाद शनिवार को बरा गांव के नीचे नदी किनारे सुमित्रा का शव दिखाई दिया, जिसके बाद उसे बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
शव को नंदानगर सीएचसी भेजा गया
शव बरामद होने के बाद प्रशासन ने उसे कब्जे में लेकर आवश्यक पंचनामा और अन्य कानूनी कार्रवाई के लिए नंदानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया है। नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
परंपराओं को लेकर भी शुरू हुई चर्चा
इस दुखद घटना के बाद स्थानीय स्तर पर मासिक धर्म से जुड़ी कुछ पुरानी सामाजिक मान्यताओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि घटना के संबंध में अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासनिक जांच एवं वास्तविक तथ्यों का सामने आना जरूरी है।
किसी गांव या समुदाय को सामूहिक रूप से जिम्मेदार ठहराने के बजाय यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि सुमित्रा नदी तक किन परिस्थितियों में पहुंची और यह दुखद हादसा आखिर कैसे हुआ।
बरसात में उफनती नदियों से सतर्क रहने की जरूरत
सुमित्रा की असमय मौत ने पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के दौरान नदी-नालों के बढ़ते खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। उफनती नदियों के किनारे जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। यह घटना एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति के साथ-साथ समाज और प्रशासन के लिए भी चेतावनी है कि महिलाओं एवं ग्रामीणों की सुरक्षा तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

🙏 उत्तराखंड केसरी परिवार की ओर से दिवंगत सुमित्रा को भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।