25 वर्षों की लोकसाधना को मिला उत्तराखण्ड गौरव सम्मान–2026, लोकगायिका हेमा नेगी करासी सम्मानित
देहरादून, 6 नवम्बर 2026।
उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति, लोकपरंपराओं एवं आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली सुप्रसिद्ध लोकगायिका, जागर गायिका एवं लोकसंस्कृति की सशक्त संवाहिका हेमा नेगी करासी को प्रतिष्ठित उत्तराखण्ड गौरव सम्मान–2026 से सम्मानित किया गया।
आज आयोजित सम्मान समारोह में माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी एवं उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी की गरिमामयी उपस्थिति में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
यह सम्मान उनके लगभग 25 वर्षों के निरंतर सांस्कृतिक योगदान, साधना, संघर्ष और उत्तराखण्ड की लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति उनके अतुलनीय समर्पण का प्रतीक है।
हेमा नेगी करासी ने अपने गायन के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोकआस्था, देवी-देवताओं की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान प्रदान की है। उनके आछरी जागर, नागराज जागर, चण्डिका भजन, पारंपरिक जागर गायन एवं मंगल गीतों ने लोकसंस्कृति की विविध विधाओं को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रमुख सम्मान एवं पुरस्कार
हेमा नेगी करासी की कला-साधना एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है। उनके प्रमुख सम्मान निम्नलिखित हैं—
1. उत्तराखण्ड गौरव सम्मान–2026 — उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, लोकसंगीत एवं पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान हेतु।
2. अडानी प्रेजेंट्स अमेजिंग इंडिया अवार्ड–2026 — भारतीय लोकसंस्कृति एवं पारंपरिक संगीत के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु।
3. उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार–2024 — संगीत नाटक अकादमी, भारत सरकार द्वारा लोकसंगीत के क्षेत्र में योगदान हेतु प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान। यह पुरस्कार 19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रदान किया गया।
4. तीलू रौतेली पुरस्कार–2025 — उत्तराखण्ड सरकार द्वारा लोकसंस्कृति, लोकसंगीत एवं पारंपरिक कला के क्षेत्र में योगदान हेतु।
5. यूथ आइकॉन नेशनल अवार्ड–2016 — उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी द्वारा सर्वश्रेष्ठ लोकगायिका के रूप में सम्मानित।
लोकसंस्कृति के संरक्षण की अनवरत साधना
गढ़वाल की सांस्कृतिक मिट्टी से जुड़ी हेमा नेगी करासी ने अपनी विशिष्ट गायन शैली, पारंपरिक वेशभूषा और लोकभाषा के माध्यम से उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुँचाया है। उन्होंने केवल लोकगीतों का गायन ही नहीं किया, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं के संरक्षण, संकलन एवं प्रचार-प्रसार की दिशा में भी निरंतर कार्य किया है।
उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की समस्त लोककलाकार बिरादरी, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का क्षण है।
H.N.K. सांस्कृतिक सेवा ट्रस्ट (पंजीकृत) की ओर से संस्थापिका एवं मुख्य ट्रस्टी श्रीमती हेमा नेगी करासी जी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं। ट्रस्ट ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के प्रयास निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेंगे।
यह सम्मान एक कलाकार की उपलब्धि के साथ-साथ उत्तराखण्ड की लोकआत्मा, सांस्कृतिक अस्मिता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का सम्मान है।

