देहरादून

अन्वेषण का केंद्र बनता राज्य का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर

मा. मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में घनघोर अंधकार से शिक्षा के उजाले की ओर जिला प्रशासन की सार्थक पहल

आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर से 154 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े

देहरादून | 18 जनवरी 2026 (सूवि)
जिले में संचालित राज्य का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) अब केवल सामाजिक पुनर्वास का ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक शोध एवं सामाजिक अध्ययन का भी केंद्र बनता जा रहा है। भिक्षावृत्ति, बालश्रम एवं कूड़ा बीनने जैसी परिस्थितियों से रेस्क्यू किए गए बच्चों का यहां माइंड रिफॉर्मेशन कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के छात्र-छात्राएं इंटेंसिव केयर सेंटर का भ्रमण कर शोध कार्य करने के साथ-साथ बच्चों की हौसला अफजाई कर रहे हैं। इसी क्रम में IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के 12 छात्र-छात्राओं ने डॉ. सुरेन्द्र यादव (सहायक प्रोफेसर) के नेतृत्व में केंद्र का भ्रमण किया।

इस अवसर पर ICC के बच्चों ने अतिथियों का स्वयं के हाथों से बनाए गए स्वागत कार्ड और सुंदर स्वागत नृत्य के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया। इस सहभागिता से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, प्रस्तुति कौशल एवं टीमवर्क के सकारात्मक विकास की स्पष्ट झलक देखने को मिली।


सामाजिक पुनर्वास में स्थापित हो रहे नए आयाम
मा. मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है। यहां रेस्क्यू किए गए बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेलकूद एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से मानसिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
सड़कों पर बिखरे बचपन से भिक्षा का कटोरा छीनकर शिक्षा की कलम सौंपने का यह मानवीय प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहा है और यह केंद्र आज सैकड़ों बच्चों के लिए आशा की किरण बन चुका है।
154 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े
शनिवार को भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए 27 बच्चों को इंटेंसिव केयर सेंटर से विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया।
अब तक—
कुल 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू
154 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया
दिसंबर 2024 से संचालित इस अभियान के अंतर्गत साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित इंटेंसिव केयर सेंटर में बच्चों को रखा गया, जिनमें
83 बच्चे भिक्षावृत्ति से
117 बच्चे कूड़ा बीनने से
67 बच्चे बालश्रम से रेस्क्यू किए गए।
समग्र सुविधाएं और सतत निगरानी
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ICC में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। यहां पढ़ाई के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, खेल, व्यायाम, मनोरंजन, काउंसलिंग तथा बच्चों के आवागमन हेतु विशेष कैब सुविधा भी प्रदान की गई।
इस पूरे कार्यक्रम की जिलाधिकारी द्वारा नियमित एवं व्यक्तिगत मॉनिटरिंग की गई। मानसिक रूप से सशक्त किए जाने के बाद बच्चों का चरणबद्ध तरीके से सरकारी विद्यालयों में दाखिला कराया गया।
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा—
“शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि—
“भिक्षावृत्ति निवारण अभियान पूर्ण सेचुरेशन तक निरंतर जारी रहेगा। रुकना कोई विकल्प नहीं है।”

Uma Shankar Kukreti