शहीद स्मारक में आंदोलनकारियों का धरना और क्रमिक अनशन 21वें दिन भी जारी
21वें दिन भी नहीं टूटा आंदोलनकारियों का हौसला, नियुक्ति की मांग को लेकर धरना जारी13 वर्षों के इंतजार के बाद छलका आंदोलनकारियों का दर्द, सरकार से जल्द नियुक्ति की मांग
खटीमा से उत्तरकाशी तक एकजुट हुए आंदोलनकारी, नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष तेज
नियुक्ति की आस में बीत गए 13 साल, अब निर्णायक लड़ाई के मूड में आंदोलनकारी
देहरादून, 5 जुलाई। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच के तत्वावधान में उत्तराखंड आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद पिछले दो वर्षों से नियुक्तियां नहीं मिलने के विरोध में शहीद स्मारक, देहरादून में चल रहा धरना-प्रदर्शन एवं क्रमिक अनशन रविवार को 21वें दिन भी जारी रहा।
क्रमिक अनशन के 21वें दिन खटीमा से पहुंचे बलवंत सिंह भाटिया, होशियार सिंह ज्याला तथा उत्तरकाशी से आईं शकुंतला रावत अनशन पर बैठे।
खटीमा से आए आंदोलनकारी साथियों ने कहा कि पिछले 13 वर्षों से नियुक्ति का इंतजार करते-करते अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है। उनका कहना था कि इस मामले में शासन और प्रशासन पहले ही काफी विलंब कर चुके हैं। नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों की आयु सीमा लगातार बढ़ रही है और नौकरी के लिए उपलब्ध सेवा अवधि भी कम होती जा रही है। ऐसे में सरकार को इस मामले का शीघ्र समाधान निकालते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
संयुक्त मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा ने कहा कि खटीमा से आए साथियों के जुड़ने से आंदोलन को नई ऊर्जा और मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि अब उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से अपनी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे आंदोलनकारी और उनके आश्रित एक मंच पर एकजुट होकर सरकार से अपने अधिकार और नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन को समर्थन देने वालों में राज्य आंदोलनकारी मंच के सलाहकार केशव उनियाल, जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, राम लाल, खटीमा से भूपेंद्र सिंह ज्याला और दीवान सिंह धामी, विकासनगर से राम किशन और चमन सिंह, ऋषिकेश से शैलेश सेमवाल, उत्तरकाशी से शिव सिंह रावत, चिन्हित आंदोलनकारी संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल, मसूरी से बिल्लू बाल्मिकी और क्रांति अभिषेक, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष विनोद असवाल तथा नेताजी संघर्ष समिति के प्रभात डंडरियाल सहित अनेक आंदोलनकारी मौजूद रहे।
