चार साल बाद मिली न्याय की उम्मीद: कोर्ट के आदेश पर फर्जी डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर होगा मुकदमा दर्ज
बिना मान्य चिकित्सकीय योग्यता अस्पताल संचालन के आरोप, पुलिस ने चार साल तक नहीं की FIR; अधिवक्ता शिवा वर्मा की पैरवी रंग लाई
देहरादून, 14 जुलाई। देहरादून की एक अदालत ने कथित फर्जी डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ महत्वपूर्ण आदेश देते हुए थाना नेहरू कॉलोनी को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश पंचम अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/एसीजेएम, देहरादून ने धारा 175(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत पारित किया।
मामला वर्ष 2022 का है। शिकायतकर्ता मेनपाल आलम ने आरोप लगाया कि सड़क दुर्घटना में घायल उनके पुत्र गौरव कुमार को उपचार के लिए रिस्पना पुल स्थित प्रसाद मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि अस्पताल में समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया, गंभीर चोट होने के बावजूद उपचार में लापरवाही बरती गई और बाद में मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद उन्होंने कई बार पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन लगभग चार वर्षों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
मेडिकल काउंसिल की जांच में सामने आए तथ्य
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की जांच में एक चिकित्सक के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जबकि अन्य संबंधित चिकित्सकों को चेतावनी दी गई। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मिस्टर आलम स्वयं चिकित्सक नहीं बल्कि व्यवसायी हैं और अस्पताल का संचालन वेतनभोगी डॉक्टरों की टीम के माध्यम से किया जा रहा था।
न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों और मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया मामला संज्ञेय अपराध का माना।
कोर्ट ने दिए एफआईआर के निर्देश
अदालत ने अपने आदेश में थाना नेहरू कॉलोनी के प्रभारी को निर्देश दिया है कि शिकायत में वर्णित तथ्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों के विरुद्ध उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना शुरू की जाए तथा की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराया जाए।
अधिवक्ता शिवा वर्मा की पैरवी से मिली राहत
इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिवा वर्मा ने न्यायालय में पैरवी की। न्यायालय के आदेश के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अधिवक्ता शिवा वर्मा ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि जांच में दोष सिद्ध होते हैं तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
नोट: यह समाचार न्यायालय के आदेश और याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
