हृदय के वाल्व में गंभीर लीकेज, बिना सर्जरी एम्स ऋषिकेश ने किया सफल इलाज
टीईईआर तकनीक से 65 वर्षीय बुजुर्ग को मिला नया जीवन
ऋषिकेश | 8 जनवरी 2026
एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। संस्थान के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों ने 65 वर्षीय एक ऐसे मरीज का बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सफल इलाज किया, जिसके हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज के कारण हृदय की पम्पिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी।
वाल्व की गंभीर खराबी और उम्र अधिक होने के कारण मरीज ओपन हार्ट सर्जरी कराने की स्थिति में नहीं था। ऐसे में चिकित्सकों ने अत्याधुनिक एवं न्यूनतम इनवेसिव तकनीक ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टीईईआर) का उपयोग करते हुए माइट्राक्लिप डिवाइस की सहायता से वाल्व की लीकेज को सफलतापूर्वक ठीक किया।
एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा यह जटिल प्रक्रिया 30 दिसंबर 2025 को संपन्न की गई। इलाज के बाद मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और उसे हाल ही में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
मरीज का अनुभव
रोगी जगतवीर सिंह, निवासी ग्राम मोहनपुर जट, तहसील रुड़की ने बताया कि वर्ष 2023 में उनके हृदय में स्टेंट डाले गए थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उन्हें सांस फूलने और चलने-फिरने में गंभीर दिक्कत हो रही थी। जांच में उनके हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज पाई गई थी, जिसके लिए सर्जरी की सलाह दी गई। जोखिम अधिक होने के कारण उन्होंने एम्स ऋषिकेश में परामर्श लिया, जहां टीईईआर तकनीक से उनका सफल इलाज किया गया।
विशेषज्ञों की राय
एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट एडिशनल प्रोफेसर डॉ. बरूण कुमार ने बताया कि मरीज के हृदय की पम्पिंग क्षमता सामान्य 60 प्रतिशत की तुलना में घटकर 20 प्रतिशत रह गई थी। टीईईआर एक इंटरवेंशनल प्रक्रिया है, जो बिना छाती खोले की जाती है और इससे मरीज को तेजी से राहत मिलती है।
इस सफल उपचार टीम में डॉ. बरूण कुमार के साथ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुवेन कुमार, सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अजय कुमार सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।
क्या है टीईईआर तकनीक
टीईईआर प्रक्रिया में जांघ की रक्त नली के माध्यम से एक विशेष क्लिप हृदय तक पहुंचाई जाती है, जिससे माइट्रल वाल्व के लीकेज वाले हिस्सों को आपस में जोड़कर रक्त के उल्टे प्रवाह को काफी हद तक रोका जाता है। इससे मरीज को सांस फूलने, थकान और दैनिक गतिविधियों में होने वाली परेशानी से बड़ी राहत मिलती है।
संस्थान का बयान
प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान में उपलब्ध विश्वस्तरीय हृदय रोग उपचार सुविधाओं और चिकित्सकों की विशेषज्ञता को दर्शाती है। नई तकनीकों के माध्यम से जटिल हृदय रोगों का इलाज अब बिना ओपन हार्ट सर्जरी के भी संभव हो रहा है, जिससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आ रहा है।
