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काली पट्टी बांधकर विरोध पर उतरे आयुर्वेदिक चिकित्सक, 15 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

के एस असवाल गौचर चमोली : आयुर्वेदिक चिकित्सक विरोध दूसरे दिन भी जारी,

सात सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज

आयुर्वेदिक चिकित्सक विरोध प्रदेशभर में दूसरे दिन भी जारी रहा। राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा संघ के आह्वान पर चिकित्सकों ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर बाहों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं जारी रखते हुए सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने का प्रयास किया।

संघ का कहना है कि यदि सरकार द्वारा उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

मुख्य विन्दु-

  • आयुर्वेदिक चिकित्सक विरोध क्यों कर रहे हैं?
  • सात सूत्रीय मांगें क्या हैं?
  • आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम
  • क्या बोले संघ के पदाधिकारी?
  • हड़ताल की चेतावनी
  • निष्कर्ष

आयुर्वेदिक चिकित्सक विरोध क्यों कर रहे हैं?

राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा संघ लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की मांग कर रहा है। संघ का कहना है कि कई महत्वपूर्ण विषय वर्षों से लंबित हैं, जिससे चिकित्सकों के कैरियर और सेवा शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

संघ के अध्यक्ष Dr. Neeraj Kohli डॉ. नीरज कोहली ने बताया कि प्रदेशभर के चिकित्सकों ने सोमवार से काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।


आयुर्वेदिक चिकित्सक विरोध की सात प्रमुख मांगें

चिकित्सकों ने सरकार के समक्ष सात सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:

1. विभागीय निदेशक की नियुक्ति

चिकित्सा संवर्ग के लिए विभागीय निदेशक की नियुक्ति की जाए।

2. एसीपी और एमएसीपी का लाभ

समयबद्ध एसीआर पूर्ण कर चिकित्सकों को एसीपी एवं एमएसीपी का लाभ दिया जाए।

3. डीएसीपी लागू किया जाए

चिकित्सा अधिकारियों को डीएसीपी (Dynamic Assured Career Progression) का लाभ प्रदान किया जाए।

4. विभागीय ढांचे का पुनर्गठन

विभागीय संरचना में सुधार कर पदोन्नति के अवसर बढ़ाए जाएं।

5. उच्च शिक्षा के लिए अवकाश

चिकित्सा अधिकारियों को सेवा अवधि के दौरान स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों हेतु तीन वर्ष तक पूर्ण वेतन सहित अवकाश की सुविधा दी जाए।

6. 2024 बैच का स्थायीकरण

वर्ष 2024 बैच के चिकित्साधिकारियों का शीघ्र स्थायीकरण किया जाए।

7. बायोमेट्रिक समस्याओं का समाधान

मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति और आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली से उत्पन्न समस्याओं का निराकरण किया जाए।


आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित

संघ ने आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया है।

आंदोलन की रूपरेखा

  • 8 जून से 10 जून तक : काली पट्टी बांधकर ओपीडी संचालन
  • 11 और 12 जून : आधे दिन ओपीडी संचालन
  • 13 जून : पूर्ण ओपीडी बंद कर जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन
  • 15 जून से : अनिश्चितकालीन हड़ताल

संघ का कहना है कि यदि सरकार द्वारा समय रहते मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।


मरीजों की सेवाएं फिलहाल जारी

चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान चरण में मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ओपीडी सेवाएं जारी रखी जा रही हैं। हालांकि मांगों की अनदेखी होने पर आगामी चरणों में सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

आंदोलनकारी चिकित्सकों का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान कराना है।


क्या बोले डॉ. नीरज कोहली?

संघ अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली ने कहा कि चिकित्सकों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। उन्होंने सरकार से शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 15 जून से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को मजबूरी में लागू करना पड़ेगा।


निष्कर्ष

आयुर्वेदिक चिकित्सक विरोध अब आंदोलन के अगले चरण की ओर बढ़ रहा है। प्रदेशभर के चिकित्सक सात सूत्रीय मांगों को लेकर एकजुट दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और संघ के बीच होने वाली बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय करेगी।

यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 15 जून से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

K. S. Aswal