New Delhiदेहरादून

इंडिया हैबिटेट सेंटर में BRICS डायलॉग 2026: ब्रह्मकमल फाउंडेशन की निदेशक डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने रखा उत्तराखंड के सतत विकास और मातृशक्ति का पक्ष

 

नई दिल्ली / देहरादून:देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय BRICS डायलॉग 2026 में उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। देहरादून स्थित सामाजिक संस्था ब्रह्मकमल फाउंडेशन की निदेशक, प्रमुख तकनीकी वैज्ञानिक एवं प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सुनीता विद्यार्थी (Dr. Sunita Vidyarthi) ने सम्मेलन में राज्य का प्रतिनिधित्व किया और हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास, महिला सशक्तिकरण व वैश्विक नवाचार पर अपने विचार रखे।मुख्य विषय और सत्रभारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के क्रम में आयोजित इस उच्चस्तरीय संवाद का मुख्य केंद्रबिंदु “रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी” रहा। सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के नीति निर्माताओं, थिंक-टैंक्स, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे प्रतिनिधियों ने भाग लिया।डॉ. सुनीता विद्यार्थी के संबोधन के मुख्य बिंदुसत्र के दौरान डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका और उत्तराखंड के संदर्भ में जमीनी वास्तविकताओं के समन्वय पर विशेष जोर दिया:वैश्विक पटल पर भारत की टेक्नोलॉजी लीडरशिप: डॉ. सुनीता विद्यार्थी ने अपने संबोधन में गर्व के साथ इस बात को रेखांकित किया कि आज भारत AI इनोवेशन (कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार), वॉटर मैनेजमेंट (जल प्रबंधन), और ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) के क्षेत्रों में एक वैश्विक मार्गदर्शक और टेक्नोलॉजी लीडर के तौर पर लगातार आगे बढ़ रहा है। भारत के ये बढ़ते कदम ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स देशों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।तकनीक और नवाचार का जमीनी उपयोग: एक प्रमुख तकनीकी वैज्ञानिक होने के नाते उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक विज्ञान, एआई (AI) और तकनीकी नवाचार का लाभ केवल महानगरों तक सीमित न रहकर दूरस्थ पर्वतीय गांवों तक पहुँचना चाहिए।

 

हिमालयी पर्यावरण और सतत विकास: उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास और जल प्रबंधन की नीतियां पर्यावरण के अनुकूल होनी चाहिए। पारिस्थितिक संतुलन और स्थानीय आजीविका दोनों को साथ लेकर चलना ही असली प्रगति है।मातृशक्ति व महिला नेतृत्व: उत्तराखंड की सशक्त मातृशक्ति की मिसाल देते हुए उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्थानीय हस्तशिल्प और स्वयं सहायता समूहों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की बात कही।औद्योगिक साझेदारी और सामाजिक कार्य: FICCI FLO की सदस्य के तौर पर उन्होंने उद्योगों और जमीनी स्तर के गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।राज्य के लिए गर्व का क्षणब्रह्मकमल फाउंडेशन द्वारा उत्तराखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक उत्थान के लिए किए जा रहे निरंतर कार्यों को इस मंच पर भरपूर सराहना मिली। अंतरराष्ट्रीय मंच पर डॉ. सुनीता विद्यार्थी की इस सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया कि उत्तराखंड की बौद्धिक और सामाजिक क्षमता वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।सम्मेलन के समापन पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने डॉ. सुनीता विद्यार्थी के वक्तव्य की सराहना करते हुए इसे उत्तराखंड और देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।