ऋषिकेश

उत्तराखंड के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहने संबंधी टिप्पणी पर अखिलेश यादव से स्पष्टीकरण और माफी की मांग

 

उत्तराखंड कोई साधारण भूमि नहीं, बल्कि वीरों, सैनिकों और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले लोगों की देवभूमि है। यहां के लोगों ने देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में अपने परिश्रम और योगदान से राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है।

अखिलेश यादव द्वारा उत्तराखंड मूल के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहे जाने संबंधी टिप्पणी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति ने दूसरे राज्य में जाकर मेहनत-मजदूरी की, रोजगार प्राप्त किया या देश की सेवा की, तो उसे घुसपैठिया कहना कहां तक उचित है? हालांकि, इस टिप्पणी के सटीक संदर्भ और मूल बयान की पुष्टि आवश्यक है।

उत्तराखंड के इतिहास में वर्ष 1994 का राज्य आंदोलन एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील अध्याय है। अलग राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस कार्रवाई की घटना आज भी राज्य के जनमानस में गहरी पीड़ा के रूप में याद की जाती है। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे।

उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं और राज्य के ऐतिहासिक संघर्ष का सम्मान करते हुए राजनीतिक दलों को अपने सार्वजनिक बयानों में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी राज्य के लोगों के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़े विषयों पर जिम्मेदारी से बात करना आवश्यक है।

उत्तराखंड के लोगों की मांग है कि अखिलेश यादव इस टिप्पणी के संदर्भ में अपना पक्ष स्पष्ट करें। यदि उनके बयान से उत्तराखंडवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना चाहिए।

देवभूमि उत्तराखंड के सम्मान और स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं।

#उत्तराखंड #देवभूमि #उत्तराखंड_स्वाभिमान #अखिलेशयादव #उत्तराखंडआंदोलन