देहरादून

देहरादून में सवर्ण समाज का समानता सम्मेलन सम्पन्न, जातीय कानूनों और आरक्षण व्यवस्था पर हुआ मंथन

देहरादून, 27 सितंबर 2026। उत्तराखण्ड समानता पार्टी एवं अखिल भारतीय समानता मंच के संयुक्त तत्वावधान में देहरादून में सवर्ण समाज का समानता सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में जातीय आधार पर लागू कानूनों, आरक्षण व्यवस्था, अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रावधानों तथा सवर्ण समाज के लिए पृथक आयोग के गठन सहित विभिन्न विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

सम्मेलन की अध्यक्षता उत्तराखण्ड समानता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी.एस. नेगी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज ने संबोधित करते हुए जातीय आधार पर बनाए गए कानूनों में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनके मत में ऐसे प्रावधान सामाजिक सौहार्द के लिए चुनौती बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन कानूनों में संशोधन नहीं किया गया तो देश में गंभीर सामाजिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

सम्मेलन में प्रदेश के बाहर से आए विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं समानता के पक्षधर प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। ‘सच संविधान का’ पुस्तक के लेखक एवं एसएसपी के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट पंकज त्रिपाठी ने सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों तथा संविधान में हुए संशोधनों का उल्लेख करते हुए राजनीतिक स्तर पर वैकल्पिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर बल दिया।

पूर्व डीआईजी जुगल किशोर तिवारी, आईपीएस ने जातीय कानूनों के माध्यम से सामान्य वर्ग के उत्पीड़न संबंधी आशंकाओं का उल्लेख करते हुए कानूनों की समीक्षा और आवश्यक संशोधन की बात कही।

आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट पर चर्चा

सम्मेलन में जातिगत आरक्षण, अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989, यूजीसी के नए प्रावधानों तथा सशक्त सवर्ण आयोग के गठन की मांग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय महासचिव वी.पी. नौटियाल ने मंच की ओर से विभिन्न न्यायालयों में पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े मामलों में दाखिल अपीलों की जानकारी दी। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व को भी आवश्यक बताया और कहा कि केवल आंदोलन एवं न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से सभी मुद्दों का समाधान संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड समानता पार्टी मंच के मुद्दों के साथ खड़ी है, इसलिए पार्टी को मजबूत करने की आवश्यकता है।

सभी जिलों में जनजागरण का ऐलान

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी.एस. नेगी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तथा जातीय आधार पर बनाए गए कानूनों पर व्यापक चर्चा के बाद आवश्यक संशोधन किए जाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से उत्तराखण्ड के सभी जनपदों में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान लोगों को पार्टी एवं मंच द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों की जानकारी देने के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के रुख को भी जनता के सामने रखा जाएगा।

कई राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधि

सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश से देवभूमि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूमित ठाकुर, क्षत्रिय चेतना मंच उत्तराखण्ड के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट रवि नेगी, महानगर शाखा अध्यक्ष ठाकुर रणजीत सिंह कैन्तुरा, अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी.एन. शाहू, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र पाण्डे, डा. जी.सी. पाण्डे, अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष त्रिभुवन शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज, विशिष्ट अतिथियों एवं पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम का संचालन वी.पी. नौटियाल, वी.के. धस्माना एवं टी.एस. नेगी ने संयुक्त रूप से किया। अखिल भारतीय समानता मंच के प्रांतीय महासचिव जे.पी. कुकरेती ने मंच के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। समानता पार्टी के प्रमुख महासचिव एल.पी. रतूड़ी तथा संगठन महासचिव श्रीधर प्रसाद नैथानी सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी विचार रखे।

बड़ी संख्या में लोगों ने किया प्रतिभाग

सम्मेलन में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोगों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में बी.एस. भंडारी, प्रो. भगवती प्रसाद पुरोहित, पवन डोभाल, राजेन्द्र प्रसाद जोशी, आशुतोष नेगी, विशाल शर्मा, रीता कौल, ऊषा डोभाल, पी.सी. तिवारी, वैभव जोशी, डा. भरत सिंह बिष्ट, ऊमा शंकर थपलियाल, ऊमा शंकर कुकरेती, गुलाब सिंह बेडवाल, राजेन्द्र सिंह पंवार, नरेन्द्र कुमार मुण्डेपी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

सम्मेलन में वक्ताओं ने समानता, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तथा जातीय आधार पर बने कानूनों में आवश्यक सुधार को लेकर अपने-अपने विचार और मांगें सामने रखीं।