ऋषिकेशदेहरादून

फर्जी मुकदमे, जेल और अब गायब CCTV: ऋषिकेश कोतवाली पर गंभीर आरोप

 

वादी सुदेश भट्ट का दावा—सच छुपाने के लिए बदले जा रहे बयान, आरटीआई में खुला विरोधाभास

देहरादून/ऋषिकेश | विशेष खोजी रिपोर्ट

ऋषिकेश कोतवाली से जुड़ा एक मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है, जहां वादी सुदेश भट्ट ने पुलिस पर फर्जी मुकदमे में फंसाने और बाद में साक्ष्य छुपाने के आरोप लगाए हैं।
वादी के अनुसार, उनके साथ एक ऐसी घटना हुई जिसमें उन्हें कथित रूप से गलत तरीके से आरोपी बनाकर जेल भेजा गया। जेल से रिहाई के बाद उन्होंने सच्चाई सामने लाने के लिए कोतवाली ऋषिकेश में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज आरटीआई के माध्यम से मांगी, ताकि यह साबित किया जा सके कि उनके साथ क्या हुआ था।
क्या है पूरा मामला?
सुदेश भट्ट का आरोप है कि जिस दिन घटना हुई, उस दिन की सीसीटीवी फुटेज में पूरी सच्चाई कैद थी। लेकिन जब उन्होंने यह फुटेज मांगी, तो पुलिस ने पहले इसे देने से साफ इनकार कर दिया।
पहले जवाब में पुलिस ने कहा कि थाने में सुरक्षा कारणों, मुखबिरों की आवाजाही, शस्त्रागार की गतिविधियों और महिला पीड़ितों की निजता के चलते वीडियो उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।
फिर बदला बयान
मामला जब सूचना आयोग तक पहुंचा, तो कोतवाली का रुख अचानक बदल गया। नए लिखित जवाब में कहा गया कि 26 जनवरी को बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण सीसीटीवी कैमरे बंद हो गए थे और तकनीकी खराबी के चलते डीवीआर सिस्टम की रिकॉर्डिंग स्वतः फॉर्मेट हो गई, जिससे पूरा डेटा नष्ट हो गया।
तकनीकी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि समस्या के समाधान के लिए तकनीशियन को बुलाया गया था और बाद में नए सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही गई।
उठते बड़े सवाल
अगर फुटेज 26 जनवरी को ही नष्ट हो गई थी, तो पहले जवाब में इसका जिक्र क्यों नहीं किया गया?
पहले “सुरक्षा कारण” और बाद में “तकनीकी खराबी”—आखिर सच्चाई क्या है?
क्या फुटेज जानबूझकर हटाई गई?
क्या यह मामला साक्ष्य मिटाने की कोशिश का संकेत है?
वादी का आरोप
सुदेश भट्ट का कहना है कि उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाया गया और अब उस घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों को भी सामने आने से रोका जा रहा है।
उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।
निष्कर्ष
यह मामला अब सिर्फ एक आरटीआई विवाद नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
अब सबकी नजर सूचना आयोग और उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी या नहीं।

Uma Shankar Kukreti