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चमोली में वनकर्मियों को रस्सियों से बांधाः गुलदार के हमले के बाद देरी से पहुंची टीम, लापरवाही पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा

चमोली
चमोली जनपद के उजिटिया गांव में गुलदार के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। एक गोशाला में घुसकर गुलदार द्वारा दो मवेशियों को मार डाले जाने की घटना के बाद जब वन विभाग की टीम देरी से मौके पर पहुंची, तो गुस्साए ग्रामीणों ने एक फॉरेस्टर समेत छह वनकर्मियों को रस्सियों से बांधकर करीब दो घंटे तक बंधक बनाए रखा।

रात में हमला, सुबह खुला राज

मंगलवार रात उजिटिया निवासी राजेंद्र मेहरा की गोशाला में गुलदार घुस आया। उसने वहां बंधी एक गर्भवती गाय और दो वर्षीय बछड़े पर हमला कर दोनों को मार डाला। बुधवार सुबह जब राजेंद्र की पत्नी कस्तूरा देवी रोज की तरह चारा डालने गोशाला पहुंचीं, तो मवेशियों को लहुलुहान हालत में मृत पाया। सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और तत्काल वन विभाग को जानकारी दी गई।

देरी से पहुंची टीम, भड़का जनआक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम सुबह करीब नौ बजे गांव पहुंची। इस देरी और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर विभाग की कथित उदासीनता से ग्रामीणों, खासकर महिलाओं में रोष फैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने टीम में शामिल एक फॉरेस्टर और पांच अन्य कर्मियों को पकड़कर रस्सियों से बांध दिया। ग्रामीणों का कहना था कि विभाग केवल औपचारिकता निभाता है, जबकि उनकी आजीविका लगातार नष्ट हो रही है।

‘अल्मोड़ा में फुर्ती, चमोली में देरी क्यों?’

ग्राम प्रधान दीपा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र नेगी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने अल्मोड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इसी तरह की घटनाओं के बाद दो दिनों के भीतर पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ लिया गया था, जबकि उजिटिया और आसपास के इलाकों में पिंजरा लगाने की अनुमति देने में जानबूझकर देरी की जा रही है।

आंकड़ों में गुलदार का आतंक

क्षेत्र में बीते एक सप्ताह से गुलदार का खौफ चरम पर है। जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने आशंका जताई कि गुलदार नरभक्षी भी हो सकता है। हाल के दिनों में भंडारीखोड में तीन गायें मारी गईं

उजिटिया में दिनदहाड़े पालतू कुत्ते पर हमला
रंगचौणा गांव में गोशाला के भीतर गाय का शिकार
इसके अलावा कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले के पसारागांव और नवाण क्षेत्रों में भी पांच गायों के मारे जाने की सूचना है।

आश्वासन के बाद छूटी टीम

करीब दो घंटे तक चले हंगामे के बाद जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि डीएफओ से वार्ता हो चुकी है और बुधवार शाम तक गांव में पिंजरा लगा दिया जाएगा। इस ठोस आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए वनकर्मियों को मुक्त किया।

Uma Shankar Kukreti