एवरेस्ट से कारगिल तक विंग कमांडर विक्रांत उनियाल ने रचा गौरवशाली इतिहास, उत्तराखंड का बढ़ाया मान
देहरादून के वायुसेना अधिकारी ने 15 वायु योद्धाओं के साथ 4,500 किलोमीटर से अधिक का साइकिल अभियान किया पूरा
श्री दरबार साहिब में मत्था टेककर श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज से लिया आशीर्वाद, बचपन से जुड़ा है आध्यात्मिक नाता
देहरादून। भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर एवं देहरादून निवासी विक्रांत उनियाल ने अपने अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के बाद अब उन्होंने भारतीय वायुसेना के ऐतिहासिक कन्याकुमारी से कारगिल साइकिल अभियान में शामिल होकर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

इस ऐतिहासिक अभियान में भारतीय वायुसेना के 15 वायु योद्धाओं ने 4,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी साइकिल से तय की। 8 अक्टूबर 2026 को वायुसेना दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचकर अभियान का समापन हुआ। अभियान का उद्देश्य ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सफेद सागर के वीर सैनिकों एवं वायु योद्धाओं के शौर्य, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन करना था।

अभियान के दौरान टीम ने तपते मैदानी इलाकों, दुर्गम पहाड़ी रास्तों, कश्मीर की वादियों और कारगिल की चुनौतीपूर्ण ऊंचाइयों को पार किया। इस दौरान विंग कमांडर विक्रांत उनियाल ने अभियान के अंतिम 1,145 किलोमीटर के चरण की योजना, समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह चरण नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से कारगिल युद्ध स्मारक तक पूरा किया गया।
श्री दरबार साहिब से है विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव
विंग कमांडर विक्रांत उनियाल का श्री दरबार साहिब और श्री गुरु महाराज जी के प्रति गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव है। उनका बचपन श्री दरबार साहिब में बीता है। वह समय-समय पर यहां मत्था टेकने और सज्जादानशीन पूजनीय श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज से आशीर्वाद लेने पहुंचते रहते हैं।
अपनी साहसिक यात्राओं और अनुभवों को उन्होंने श्री महाराज जी के साथ साझा किया। श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने उनकी उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आगामी अभियानों की सफलता के लिए आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं प्रदान कीं।
विंग कमांडर विक्रांत उनियाल ने बातचीत में कहा कि उन पर श्री गुरु महाराज जी और श्री दरबार साहिब की असीम कृपा है। यहां आकर उन्हें अपार शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। श्री दरबार साहिब से मिला आशीर्वाद उन्हें निरंतर नई चुनौतियां स्वीकार करने और देश के लिए कुछ नया करने की प्रेरणा देता है।
पहले ही प्रयास में फतह किया था एवरेस्ट
विक्रांत उनियाल की उपलब्धियों में सबसे उल्लेखनीय यह भी है कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया था। अब एवरेस्ट की बर्फीली चोटियों से लेकर कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों तक का उनका सफर साहस, अनुशासन और अटूट इच्छाशक्ति की प्रेरणादायी मिसाल बन गया है।
श्री दरबार साहिब प्रबंधन एवं श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय ने विंग कमांडर विक्रांत उनियाल की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उनकी यह सफलता न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उनका सफर युवाओं को संदेश देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। साथ ही यह अभियान देश के वीर शहीदों के प्रति कृतज्ञता और भारतीय वायुसेना के शौर्य एवं समर्पण को नमन करने का प्रेरणादायी उदाहरण है।

