देहरादून

उत्तराखंड के चकराता में काश्तकार शूरवीर जी कई तरह की जड़ी बूटियों की खेती के साथ पहली बार लैवंडर के पौधों को उगाने में पाई कामयाबी,,

 

राज्य सरकार व उद्यान विभाग अगर इनको आर्थिक सहयोग करे तो ये बहुत लोगो को रोजगारस्वरूप लैवंडर की खेती करवा के किसानों के आय बढ़ाने में मददगार सिद्ध हो सकते है ।

चकराता : जौनसार इस गांव में जन्मे पले पढ़े नोजवान काश्तकार श्री शुरबीर सिंह एक जनूनी किसान है लेकिन किसान भी ऐसे जो वैज्ञानिकी तौर पर खेती करते है, उनके कई तरह के उत्पादन जो कि कलकत्ता व देश के कई बड़ी फैक्ट्रियों में जाता है, जैसे फलों का पल्प निकालकर उसको प्रोसैसिंग करके कई बड़ी कम्पनियों को सप्लाई देते है।
इसी क्रम में उन्होंने लैवंडर की खेती करने की सोची ओर उस  पर रिसर्च शुरू कर दिया, ओर ऑन लाईन लैवंडर के पौधे के बारे में जानकारी हासिल कर , लैवंडर के पौधे पुलवामा जम्मू कश्मीर से पोस्ट ऑफिस के द्वारा मंगाने पर 10 दिन के बाद ही लैवंडर का पौधा घर पर आया लेकिन पौधों की हालत देखकर लगा इनका आगे जन्मना मुश्किल होगा ,

 

सुरबीर जी ने कहा कि 

यह लैवंडर का पौधा है जिसको कि मैंने वर्ष 2022 में सितंबर के महीने में पुलवामा से मंगवाया था एक किसान से और रिसर्च के तौर पर मंगवाया था मैंने प्लांट पोस्ट ऑफिस द्वारा 10 दिन बाद मेरे घर पहुंचा था मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह यह कटिंग कामयाब हो जाएगी लेकिन इस देवभूमि की शक्ति ने लैवंडर के पौधे को कामयाब कर दिखाया जिससे कि मुझ में यह उम्मीद जागी है कि मैं इस बार सितंबर माह में फिर 10 किलो लैवंडर की कटिंग पुलवामा से फिर मंगवा लूंगा और इसको अपने पूरे सेब के बगीचे में लगाऊंगा इससे हमारी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है और सेब के बगीचों में जो बीच में खाली पड़ी बंजर जमीन है उसको हम इनकम में परिवर्तित कर सकते हैं और सेब के बगीचे के साथ-साथ हम आसानी से हर्बल के पौधों की खेती भी कर सकते हैं जिससे कि हमें डबल मुनाफा होगा और हर्बल के पौधों की खेती करने से खेतों की जमीन उपजाऊ और रोगाणु नाशक होती है और प्रकृति के लिए भी बहुत ही फायदेमंद साबित होती है हर्बल की खेती और इसमें अगर मुझे राज्य सरकार या उद्यान विभाग कोई मदद करता है तो मैं जौनसार बावर में हर्बल की खेती के प्रोजेक्ट किसानों को देने के लिए तैयार हूं जिससे कि हमारे किसानों को बहुत अच्छा मुनाफा होगा।।

लैवंडर पौधे पर मैंने वर्ष 2022 से मैंने अपना रिसर्च शुरू किया ओर मैंने पुलवामा से लैवंडर के पौधे की कुछ कटिंग मंगवाई सितंबर के महीने में पोस्ट ऑफिस द्वारा यह कटिंग भेजी गई 10 दिन बाद पुलवामा से मेरे घर यह पौधे की कटिंग पहुंची मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि यह पौधे कामयाब हो जाएंगे क्योंकि पौधे की कटिंग काफी मुरझा चुकी थी लेकिन फिर भी इस देवभूमि की शक्ति ने मेरे रिसर्च को कामयाब किया और मुझे एक नया मार्ग दीया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *