*लालढांग–चिल्लरखाल मोटर मार्ग : कोटद्वार के रोजगार और विकास का अधूरा सपना, एस एस नेगी
नेगी जी का ऐतिहासिक विज़न आज भी ठंडे बस्ते में, नेगी जी ने विस्तार से बताई हकीकत*
कोटद्वार :
पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने वर्षों पहले जो सपना देखा था, वह केवल एक सड़क बनाने का नहीं था, बल्कि कोटद्वार को राजधानी देहरादून से सीधा जोड़कर गढ़वाल के युवाओं को उद्योग और रोज़गार दिलाने का सपना था।
उनका स्पष्ट विज़न था कि –जब कोटद्वार को ग्रोथ सेंटर बनाया गया, तो यदि लालढांग–चिल्लरखाल मोटर मार्ग समय पर बन जाता, तो यहाँ फैक्ट्रियाँ और उद्योग बड़ी संख्या में स्थापित होते। इससे सीधे-सीधे 40 से 50 हज़ार युवाओं को रोजगार मिलता।
कोटद्वार का व्यापार नई उड़ान भरता और यह शहर गढ़वाल का सबसे बड़ा औद्योगिक व पर्यटन केंद्र बन जाता। लेकिन यह मार्ग लगातार राजनीतिक उदासीनता और सत्ता परिवर्तन की भेंट चढ़ता रहा।
✦ वर्षवार घटनाक्रम
29 मार्च 2003
कांग्रेस सरकार में कोटद्वार–रैंथीखाल मार्ग का प्रथम चरण (13 कि.मी.) ₹91.50 लाख की लागत से स्वीकृत किया गया।
📌 07 सितम्बर 2005
EPI कंपनी के साथ मार्ग के सुधार का MOU किया गया।
📌 03 जुलाई 2006
उत्तराखंड सरकार ने लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग निर्माण हेतु ₹278.90 लाख स्वीकृत किए।
EPI को कार्य आवंटित हुआ और निर्माण शुरू करने की अनुमति मिली।
📌 2007 (भाजपा सरकार आने के बाद) मार्च-जून में भाजपा सरकार ने इस परियोजना पर मौखिक रोक लगा दी। 20 सितम्बर 2007 को आदेश जारी कर EPI को कार्य बंद करने का निर्देश दे दिया गया।
➡ 2007–2012 तक भाजपा सरकार ने इस मार्ग पर कोई काम नहीं कराया।
📌 जून 2012 (कांग्रेस सरकार) नेगी जी के पुनः प्रयास किया गया और EPI से संपर्क किया गया।
निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार के State Wild Life Board से अनुमति प्रक्रिया शुरू हुई।
📌 06 दिसम्बर 2014 मार्ग का पुनः DPR बनी।
₹418.30 लाख की लागत से परियोजना को वन विभाग ने स्वीकृत किया, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका।
📌 22 नवम्बर 2016 ₹706.60 लाख की स्वीकृति दी गई। टेंडर आमंत्रित किए गए और 15 दिसम्बर 2016 को खोले गए।
📌 मार्च 2017 (भाजपा सरकार)
भाजपा सरकार आते ही मामला फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित बताया गया और 2017 से आज 2025 तक एक भी कदम आगे नहीं बढ़ा।
✦ जनता को क्या समझना चाहिए?
यह पूरा घटनाक्रम साफ़ करता है कि नेगी जी का विज़न स्पष्ट था : यदि यह मार्ग समय पर बन जाता तो कोटद्वार को औद्योगिक और पर्यटन हब के रूप में नई पहचान मिलती।
ग्रोथ सेंटर में फैक्ट्रियाँ खुलतीं, हजारों रोजगार बनते और कोटद्वार की अर्थव्यवस्था बदल जाती।
लेकिन सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक उदासीनता ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को रोक दिया।
आज भी यह मार्ग अदालत और फाइलों में फंसा हुआ है।
नेगी जी ने कहा –
“यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कोटद्वार की भावी पीढ़ियों का भविष्य है।
मैंने इसे गढ़वाल की आत्मा और युवाओं की रोज़गार गारंटी के रूप में देखा था।
जब तक यह मार्ग बनकर तैयार नहीं हो जाता, मेरा संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
