देहरादून में रहकर अपने गाऊँ चन्द्रापुरी रुद्रप्रयाग में 40 गरीब परिवारों के लिए राशन की व्यवस्था की एक रिटायर्ड युवा फौजी ने ।

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कोविड19 की महामारी से विश्व भर के देश कराह रहे है। इसमें हमारा देश भारत भी अछूता नही रह पाया। बहुत प्रयास के बावजूद हमारे देश मे भी धीरे धीरे कोरोना वाइरस ने पाव पसार लिए है। कई राज्यो में इसके आंकड़े सम्मानजनक नही है। अभी तक हमारे राज्य देवभूमि उत्तराखंड में इसका प्रभाव निम्न अस्थर पर रहकर पॉजिटिव 37 मामले आये। केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करते हुए उत्तराखंड में भी लॉक डाउन कड़ाई से पालन करवाया जा रहा है। जिससे सुदूर पर्वतीय इलाकों में गरीब लोगों के रोजमर्रा की चीजों की किल्लत पड़ रही है। जिसमे प्रमुख है राशन वगैरा की। इसी को ध्यान में रखते हुए रुद्रप्रयाग जिले के चन्द्रपुरी गाऊँ के रिटायर्ड आर्मी जवान श्री नरेंद्र सिंह गुसाईं जी जो कि कृष्ण विहार मोहकमपुर देहरादून में निवास करते है। इस आपदा में अपने क्षेत्र के गरीब लोगों के सहायता के लिये आगे आये। उन्होंने पहले प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री रिलीफ फंड में पैसा जमा करने की सोची लेकिन बहुत सोच विचार कर आखिर में फैसला खुद ही अपने गाऊँ रुद्रप्रयाग जिले के चन्द्रपुरी में गरीबों के लिए राशन सामग्री के लिये अपने भाई के अकाउंट में 33000 रुपये ट्रांसफर  किया । क्योकि लोक डाउन के कारण उनका वहाँ पहुचना सम्भव नही था  उनकेे  भाई ने स्थानीय मार्किट से 40 गरीब परिवारों के लिए 5 किलो चावल 5, किलो आटा 1 किलो चीनी, 1 किलो दाल, चायपत्ती, तेल, मशालें, इत्यादि का एक एक किट बनाकर 40 परिवारों को बंटवाया। उनके इस सामाजिक कार्य की प्रसंसा पूरे क्षेत्र में लोग कर रहे है। देहरादून में रहकर अपने गाऊँ की चिंता करना यह बहुत ही नेक दिली है। अक्सर देहरादून में भी सामाजिक कार्यो में आगे रहने वाले गुसाई जी अपने आवास कृष्ण विहार मोहकमपुर में भी काफी सक्रिय रहते है। अपनी कालोनी में भी मंदिर समिति में काफी योगदान करते है। श्री नरेन्द्र सिंह गुसाईं जी को राष्ट्रपति जी ने भी साहसिक  कार्य हेतु 2013 में  राष्ट्रपति वीरता  पुरस्कार से   सम्मानित किया है। उन्होंने 2013 में मंदाकनी नदी में  अचानक एक  सातवी क्लास की  स्कूली छात्रा  रस्सियों के  सहारे नदी पार करते समय  गिर गई थी । उस समय देवदूत बनकर छात्रा को अपनी जान की बाजी लगाकर सकुशल मंदाकनी नदी से बाहर  लाकर छात्रा की जान बचाई थी।

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