ओमप्रकाश के कारनामों की जांच का जिम्मा पुलिस दरोगा को दिया जाना है कानून का मखौल- धीरेन्द्र प्रताप

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ओमप्रकाश के कारनामों की जांच का जिम्मा पुलिस दरोगा को दिया जाना है कानून का मखौल- धीरेन्द्र प्रताप मुन्ना सिंह चौहान अब कहां है लापता बताएं भाजपा।
उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने सरकार का इस बात के लिए मखौल उड़ाया है कि वह राज्य में 12 से ज्यादा पुलिस चौकियों को पार करके गढ़वाल के अंदर तक घुस जाने वाले उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि त्रिपाठी को उत्तराखंड प्रवेश की अनुमति देने वाले अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के विरुद्ध 1 सप्ताह गुजर जाने के बाद भी बजाय कोई प्रशासनिक कार्रवाई करने के इसकी सारी जिम्मेदारी एक पुलिस दरोगा पर डाल रही है ।जोकि सरासर कानून का मजाक है।
धीरेन्द्र प्रताप ने ने कहा कि इसी तरह का एक मामला जब महाराष्ट्र में पिछले माह हुआ था जिसमें वहां के विशेष प्रधान गृह सचिव अमिताभ गुप्ता ने वहां के बड़े उद्योगपति डीएचएफएल घराने के परिवार के 23 लोगों को लाँक डाउन नियमो का उल्लंघन करके खंडाला से महाबलेश्वर तक जाने की अनुमति दी थी तो भाजपा ने राज्य में बवाल मचा दिया था और उसके बाद वहां की उद्धव ठाकरे सरकार ने उनका जवाब तलब किया गया था और जब आईएएस अधिकारी अमिताभ गुप्ता इसका कोई जवाब नहीं दे पाए तो उन्हें जांच पूरी होने तक परमानेंट छुट्टी पर भेज दिया गया था। धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि उत्तराखंड के अंदर गजब ही व्यवहार किया जा रहा है ।जो भाजपा, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार को विशेष प्रधान सचिव अमिताभ गुप्ता की लापरवाही पर पूरी सरकार को कटघरे में खड़ी कर रही थी ।वही भाजथा यहां उत्तराखंड में इस गंभीर मुद्दे पर “बिल्ली की तरह म्याऊं म्याऊं ” करने पर लगीहै। कांग्रेस नेता ने कहा इसी मसले पर लाँक डाउन के तथाकथित उल्लंघन के मसले पर पिछले दिनों जब कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह मुख्यमंत्री आवास पर जन समस्याओं का ज्ञापन देने गए थे तो जहां मुख्यमंत्री ने कांग्रेसी मंडल से मिलने से इनकार कर दिया था ।वही भाजपा के मुख्य प्रवक्ता मुन्ना चौहान ने अगले दिन प्रीतम सिंह व अन्य कांग्रेसजनों के विरुद्ध लाँक डाउन उल्लंघन का मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी ।परंतु अब जब उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि प्रदेश के कई जिलों को पार कर गए तो अब मुन्ना सिंह चौहान लापता हो गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कहा है कि वह अब जवाब दें कि उनके राज में यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा गया? महाराष्ट्र में विशेष प्रधान सचिव के विरुद्ध आवाज उठाने वाले भाजपाई उत्तराखंड में क्यों गूंगे बन कर मौन हो गए है?
अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के विरुद्ध क्यों नहीं कार्रवाई की जा रही है? सरकार जवाब दे।

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