साइंस ऑफ सर्वाइवल विषय पर यूसर्क ने किया वेबिनार आयोजित

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देहरादून:-उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) देहरादून द्वारा वर्तमान में कोविड-19 जनित परिस्थितियों में ‘साईंस ऑफ सर्वाइवल‘ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। यूसर्क के निदेशक प्रो0 दुर्गेश पंत ने वर्तमान में कोविड-19 के लाॅकडाउन की परिस्थितियों में साईंस ऑफ सर्वाइवल के महत्व को जरूरी बताया और समाज में वैज्ञानिक जागरूकता के व्यापक प्रचार-प्रसार और उसके तालमेल के साथ कार्य करने का आह्वाहन किया।

वेबिनार कार्यक्रम की समन्वयक यूसर्क की वैज्ञानिक डाॅ0 मंजू सुंदरियाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हेमवती नन्दन गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने सर्वाइवल आॅफ फिटेस्ड के विकासवाद को समझाते हुए वर्तमान कोविड महामारी के लिए प्रकृति के अनियमित दोहन को भी एक कारक बताया। आईसीमोड नेपाल के उप महानिदेशक डाॅ0 एकलव्य शर्मा ने वर्तमान में सामाजिक-आर्थिक एवं पर्यावरणीय अध्ययन हेतु सभी को अपने-अपने क्षेत्रों में दस्तावेज़ीकरण तथा उसके प्रचार प्रसार के लिए कार्य करने का आह्वाह्न किया।
सेन्टर फाॅर एनवाॅयरनमेन्ट एजूकेशन (सी.ई.ई.) नार्थ के पूर्व निदेशक डाॅ0 अवधेश गंगवार ने पर्यावरण एवं जैव विविधता के संरक्षण हेतु मिलजुल कर कार्य करने की बात कही। उन्होंने पृथ्वी में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के आपसी अंतर्सम्बन्ध ओर मानवीय दख़लअंदाजी को शानदार प्रस्तुतिकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया।
दिल्ली स्कूल आॅफ इकोनाॅमिक्स के वरिष्ठ प्रो. डाॅ0 एस.सी. राॅय ने भारत में एफ.डी.आई को बढ़ाने की बात प्रमुखता से कही उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संक्रामक दौर के बाद सारी दुनिया के लिए अपने प्रोडक्ट को बनाने के लिए भारत सबसे अच्छा विकल्प लगने लगा है। और इससे भारत में रोजगार के अवसर बढेंगे। एम्स ऋषिकेश के डाॅ0 संतोष कुमार ने कहा कि कोविड-19 से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कोविड-19 से बचाव के तरीके बताये और आम जनमानस से सरकारी नियमों निर्देशों का ठीक से अनुपालन करने की बात कही। डी.एन.ए.लैब देहरादून के डाॅ0 नरोत्तम शर्मा ने माइक्रोबायलाॅजी पर किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला।
ह्यूमन इंडिया श्रीनगर गढ़वाल के डाॅ0 जे0एस0 बुटोला ने उत्तराखण्ड में वापस लौटकर आ रहे युवाओं को हर्बल एवं जड़ी-बूटी उत्पादन में स्वरोजगार के लिए आगे आने को कहा। उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ उत्तराखण्ड में प्रतिदिन कम से कम 16 लाख रूपये की धूप अगरबत्ती की खपत होती है और अभी तक ये धूप-अगरबत्ती सब बाहर से आती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर इससे बहुत बड़ा रोजगार पैदा किया जा सकता है। यह बात उन्होंने अपने जखोली विकासखण्ड स्थित लघु उद्यम के अनुभव से कही। जिसका कच्चा माल पूर्णतः स्थानीय स्तर पर प्राप्त किया जा सकता है।
वैल्हम गल्र्स स्कूल की वरिष्ठ शिक्षिका डाॅ0 रीमा पंत ने ग्रीन इकोनाॅमिक्स पर विचार रखते हुए पर्यावरण बचाने को कहा। मणिपुर से जुड़े डाॅ0 नारायण ने पर्यावरण संरक्षण में आजीविका पर कार्य करने को कहा। एफ0आर0आई0 के सेवा निवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ0 सुभाष नौटियाल ने भोजन, सब्जी, दलहन आधारित आजीविका को पर्यावरण के अनुकूल विकसित करने की बात कही।
सिक्किम पी0जी0 काॅलेज की प्राचार्या डाॅ0 लायता उप्रेती ने पहाड़ के अनुकूल उत्पादों के संरक्षण एवं उनके उत्पादन की बात कही। आगाज़ संस्था चमोली के अध्यक्ष जे0पी0 मैठाणी ने कहा कि देश के विभिन्न भागों से वापस आ रहे युवा अपने छोटे-छोटे उद्यम शुरू करें। उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प, प्राकृतिक रेशे सम्बन्धी उत्पादन जारी रखा जा सकता है। इसके अलावा उद्यानिकी, नर्सरी, इकोटूरिज़्म आदि में बहुत सारी संभावनायें हैं।
यूसर्क के वैज्ञाजिक डाॅ0 आशुतोष भट्ट ने डिजिटल मीडिया एवं तकनीकियों के सकारात्मक अनुप्रयोगों पर चर्चा की। डिग्री काॅलेज रायपुर की प्राध्यापक डाॅ0 मधु थपलियाल ने ग्रामीण स्तर पर आर्थिकी एवं स्वरोजगार को विकसित करने की अपील की।
कार्यक्रम में यूसर्क के वैज्ञानिकों डाॅ0 वेदप्रकाश, डाॅ0 ओम प्रकाश नौटियाल, डाॅ0 भवतोष शर्मा और डाॅ0 राजेन्द्र राणा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में यूसर्क के उमेश जोशी, ओम जोशी एवं राजदीप का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में हिमालयी क्षेत्रों के अलावा उत्तराखण्ड राज्य के विभिन्न जनपदों के 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। अंत में यूसर्क के निदेशक डाॅ0 दुर्गेश पंत ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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